कोरोना के कारण अमेरिका में पढ़ाई का सपना टूटा तो देश में रहकर संवारा हुनर, अब वैश्विक मंच पर चमके देहरादून के पार्थ
अमेरिका में पढ़ाई का सपना टूटने के बाद देहरादून के पार्थ वोहरा ने औद्योगिक डिजाइनिंग में अपना हुनर संवारा। उन्होंने ...और पढ़ें

पार्थ वोहरा।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
सुकांत ममगाईं, देहरादून। अमेरिका में पढ़ाई का सपना टूटा, पर पार्थ ने अपना इरादा नहीं बदला। कोरोना महामारी और वीजा संबंधी अड़चनों के कारण उन्हें दून में ही पढ़ाई जारी रखनी पड़ी। यहीं औद्योगिक डिजाइनिंग में हुनर तराशा और वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर वैश्विक मंच पर पहचान बनाई।
दून के नेहरू कालोनी निवासी पार्थ वोहरा की शुरुआत से ही कला और रचनात्मक गतिविधियों में रुचि थी। परिवार ने भी उन्हें अपनी पसंद का करियर चुनने की पूरी आजादी दी। वर्ष 2019 में दून ब्लासम स्कूल से साइंस स्ट्रीम में 12वीं पास की। इसके बाद करियर के तमाम विकल्प सामने थे, पर उन्होंने औद्योगिक डिजाइनिंग चुना।
अमेरिका के एक विश्वविद्यालय में दाखिला भी मिल गया था, लेकिन कोरोना के कारण लाकडाउन और वीजा समेत अन्य औपचारिकताओं में आई दिक्कतों के चलते वह नहीं जा सके। इसके बाद उन्होंने दून स्थित यूपीईएस में बैचलर इन इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग में दाखिला लिया।
प्रधानमंत्री से भी मिले
वर्तमान में वह लक्सर राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स में इंडस्ट्रियल डिजाइन के तौर पर कार्यरत हैं। पार्थ बताते हैं कि औद्योगिक डिजाइन का मतलब रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों को अधिक उपयोगी, आकर्षक और सुविधाजनक बनाना है। वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में इस कौशल की परीक्षा चार दिन तक चली। इसमें शोध से शुरुआत होती है। इसके बाद हाथ से रेखाचित्र बनाने, डिजिटल डिजाइन तैयार करने, 3-डी माडल बनाने और 3-डी प्रिंटिंग जैसे चरण पूरे करने होते हैं।
यह भी पढ़ें- युवाओं के कौशल को पीएम का सलाम, वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता के प्रतिभागियों से मिलकर हाथों से खिलाई मिठाई
अंत में काम करने योग्य नमूना तैयार कर प्रस्तुत करना पड़ता है। पार्थ के अनुसार, इस सफर में उन्होंने धैर्य, समय प्रबंधन और समर्पण का महत्व सीखा। इस क्षेत्र में केवल रचनात्मक होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लगातार अभ्यास और समय का सही इस्तेमाल भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि आमतौर पर देश का प्रतिनिधित्व खेलों में देखने को मिलता है, लेकिन कौशल आधारित प्रतियोगिता में देश के लिए पदक जीतना भी गर्व की बात है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात पर बात करते उन्होंने कहा कि वे बहुत ही सहज भाव से मिले। एक पल भी नहीं लगा कि यह कोई औपचारिक मुलाकात है। पदक विजेता होने के नाते पार्थ ने बातचीत की शुरुआत की। पीएम ने उनकी पढ़ाई, औद्योगिक डिजाइनिंग और प्रतियोगिता से जुड़ी चुनौतियों समेत अन्य विषयों पर विस्तार से बात की। यह भी पूछा कि प्रतियोगिता में उन्हें किस उत्पाद का डिजाइन तैयार करने को दिया गया। जिस पर उन्होंने टार्च के ग्लास कवर का डिजाइन तैयार करने की जानकारी प्रधानमंत्री को दी।
सुकांत ममगाईं, देहरादून। अमेरिका में पढ़ाई का सपना टूटा, पर पार्थ ने अपना इरादा नहीं बदला। कोरोना महामारी और वीजा संबंधी अड़चनों के कारण उन्हें दून में ही पढ़ाई जारी रखनी पड़ी। यहीं औद्योगिक डिजाइनिंग में हुनर तराशा और वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर वैश्विक मंच पर पहचान बनाई।
दून के नेहरू कालोनी निवासी पार्थ वोहरा की शुरुआत से ही कला और रचनात्मक गतिविधियों में रुचि थी। परिवार ने भी उन्हें अपनी पसंद का करियर चुनने की पूरी आजादी दी। वर्ष 2019 में दून ब्लासम स्कूल से साइंस स्ट्रीम में 12वीं पास की। इसके बाद करियर के तमाम विकल्प सामने थे, पर उन्होंने औद्योगिक डिजाइनिंग चुना।
अमेरिका के एक विश्वविद्यालय में दाखिला भी मिल गया था, लेकिन कोरोना के कारण लाकडाउन और वीजा समेत अन्य औपचारिकताओं में आई दिक्कतों के चलते वह नहीं जा सके। इसके बाद उन्होंने दून स्थित यूपीईएस में बैचलर इन इंडस्ट्रियल डिजाइनिंग में दाखिला लिया।
प्रधानमंत्री से भी मिले
वर्तमान में वह लक्सर राइटिंग इंस्ट्रूमेंट्स में इंडस्ट्रियल डिजाइन के तौर पर कार्यरत हैं। पार्थ बताते हैं कि औद्योगिक डिजाइन का मतलब रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली चीजों को अधिक उपयोगी, आकर्षक और सुविधाजनक बनाना है। वर्ल्ड स्किल्स प्रतियोगिता में इस कौशल की परीक्षा चार दिन तक चली। इसमें शोध से शुरुआत होती है। इसके बाद हाथ से रेखाचित्र बनाने, डिजिटल डिजाइन तैयार करने, 3-डी माडल बनाने और 3-डी प्रिंटिंग जैसे चरण पूरे करने होते हैं।
यह भी पढ़ें- पहाड़ की बेटी ने विश्व मंच पर बढ़ाया देश का मान, रिटेल सेल्स में जीता सिल्वर मेडल
अपनी इस उपलब्धि से वैश्विक पहचान बनाने वाले पार्थ के पिता राहुल वोहरा का मेवा और मसालों का कारोबार है और वह पहाड़ी क्षेत्रों में इनकी आपूर्ति करते हैं। जबकि मां आकांक्षा गृहिणी हैं। उनकी छोटी बहन पल बीबीए की पढ़ाई कर रही हैं।
