हरियाणा से देहरादून में पढ़ाई करने आया और शुरू कर दिया छात्रों को अवैध शराब सप्लाई का काम, अब पुलिस ने किया भंडाफोड़
आबकारी विभाग ने देहरादून के बिधौली-कंडोली क्षेत्र में छात्रों को अवैध शराब सप्लाई करने वाले नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है।
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आबकारी विभाग द्वारा गिरफ्तार अवैध शराब की सप्लाई करने वाला आदित्य

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जागरण संवाददाता, देहरादून। बिधौली-कंडोली क्षेत्र में कालेज के छात्र-छात्राओं तक इंपोर्टेड शराब पहुंचाने वाले नेटवर्क पर आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जनपदीय प्रवर्तन दल देहरादून और आबकारी टीम मसूरी ने बिशनपुर, दादी की टपरी के पास, कंडोली-प्रेमनगर क्षेत्र में छापा मारकर 95 बोतल इंपोर्टेड शराब और बडवाइजर बीयर की 28 कैन बरामद कीं।
शराब आदित्य कुमार निवासी उत्तर प्रदेश के किराये के कमरे और घर के नीचे खड़ी बिना नंबर की टीवीएस जुपिटर स्कूटी से बरामद हुई। शराब की बोतलों पर 'फॉर सेल इन चंडीगढ़ ओनली' अंकित था। बरामद शराब में रेड लेबल और वैलेंटाइन जैसे महंगे ब्रांड शामिल हैं।
प्रभारी सहायक आबकारी आयुक्त प्रेरणा बिष्ट के निर्देशन में की गई इस कार्रवाई के दौरान पकड़े गए आदित्य ने पूछताछ में बताया कि बरामद शराब गर्वित उर्फ विक्रांत की है और उसी ने उसे बेचने के लिए दी थी। गर्वित इस समय जेल में बंद है।
आबकारी विभाग के अनुसार, गर्वित बिधौली क्षेत्र में तीन ढाबे 'ऑल राउंडर चाचा' नाम से संचालित कर रहा था। विभाग को पेट्रोलियम कॉलेज के पास और हॉस्टल में छात्रों तक शराब की डिलीवरी किए जाने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसी आधार पर टीम ने शराब के भंडारण की सूचना पर छापेमारी की।
आदित्य की गिरफ्तारी के साथ ही गर्वित के नेटवर्क की एक और कड़ी सामने आई है। इससे पहले भी इस मामले में गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। विभाग के मुताबिक, आदित्य ने गर्वित के लिए शराब बेचने का काम किया। आबकारी विभाग और पुलिस उसे पूर्व में भी शराब बेचने के मामलों में कई बार पकड़ चुके हैं।
अब बरामद शराब के स्रोत और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। आबकारी विभाग की इस कार्रवाई में आबकारी निरीक्षक मसूरी दिवाकर चौधरी, आबकारी निरीक्षक प्रवर्तन दल देहरादून जयवीर सिंह, उप आबकारी निरीक्षक उमराव सिंह राठौर, आशीष प्रकाश, अर्जुन सिंह, विजय कोठियाल, हेड कांस्टेबल राकेश नाथ, गोविंद सिंह, हेमंत, नौशाद और रीनू कुमार शामिल रहे।
डेढ़ महीने की जांच के बाद मास्टरमाइंड ने किया था सरेंडर
गर्वित उर्फ विक्रांत की भूमिका सामने आने के बाद आबकारी विभाग ने जांच तेज कर दी थी। इससे पहले 25 अगस्त को दो आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था।
पूछताछ और मिले सुरागों के आधार पर विभाग ने नेटवर्क की दूसरी कड़ियों की पड़ताल शुरू की। इसी क्रम में गर्वित की मां को भी अवैध शराब की बिक्री और उसे कब्जे में रखने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।
आबकारी विभाग के मुताबिक, पिछली कार्रवाई के दौरान गर्वित फरार हो गया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने पहले देहरादून जिला न्यायालय में जमानत याचिका दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया।
इसके बाद नैनीताल हाईकोर्ट से भी उसे राहत नहीं मिली। लगातार कार्रवाई और जांच के बीच गर्वित ने सात अक्टूबर को देहरादून के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। अदालत से उसे जेल भेज दिया गया।
विभाग का कहना है कि गर्वित पिछले एक साल से अधिक समय से बिधौली क्षेत्र में सक्रिय था। उसकी गिरफ्तारी के बाद भी नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच जारी रही। आठ अक्टूबर को आदित्य के कमरे से शराब की बरामदगी इसी कार्रवाई का हिस्सा है।
रेट कार्ड से वाट्सऐप ग्रुप तक, छात्रों तक ऐसे पहुंचती थी शराब
जांच में सामने आया है कि शराब की कथित अवैध सप्लाई केवल खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं थी। इसके लिए ग्राहकों तक पहुंच बनाने, ऑर्डर लेने, भुगतान का हिसाब रखने और डिलीवरी करने वाले युवाओं की निगरानी की व्यवस्था तैयार की गई थी।
हॉस्टल-पीजी तक पहुंचता था रेट कार्ड
आरोप है कि शराब की कीमत और उपलब्धता बताने वाला रेट कार्ड हॉस्टल और पीजी में रहने वाले छात्र-छात्राओं तक पहुंचाया जाता था। इसके माध्यम से ग्राहक शराब की जानकारी लेकर ऑर्डर कर सकते थे। इस तरह शैक्षणिक क्षेत्र में रहने वाले युवाओं तक सीधे पहुंच बनाई गई।
वाट्सऐप ग्रुप में लगती थी हाजिरी
गर्वित ने शराब की बिक्री और डिलीवरी के लिए वाट्सऐप ग्रुप बनाया हुआ था। विभाग के अनुसार, इसमें डिलीवरी करने वाले युवाओं को सुबह और शाम सेल्फी तथा लोकेशन साझा कर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी पड़ती थी। इसी व्यवस्था के जरिये उनके काम पर नजर रखी जाती थी।
गरीब छात्रों को पैसे का लालच देने का आरोप
आबकारी विभाग के अनुसार, गर्वित कॉलेज के आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को पैसे का प्रलोभन देकर शराब की होम डिलीवरी के काम में लगाता था। कुछ युवाओं को डराने-धमकाने के आरोप भी सामने आए हैं। विभाग का दावा है कि इस काम के लिए कुछ युवाओं को हरियाणा से भी लाया गया था।
बिना नंबर की स्कूटी से डिलीवरी
विभाग के मुताबिक, गर्वित ने शराब की तस्करी और बिक्री के लिए क्षेत्र में करीब 10 बिना नंबर की स्कूटी सक्रिय की थीं। पिछले दो महीने में आबकारी विभाग ने गर्वित की चार बिना नंबर की स्कूटी आबकारी अधिनियम की धारा 72 के तहत जब्त की हैं। इस व्यवस्था के जरिये हॉस्टल और पीजी तक शराब पहुंचाई जाती थी।
हरियाणा से पढ़ाई करने आया, बिधौली में फैलाया कारोबार
गर्वित मूल रूप से हरियाणा का रहने वाला है। वह वर्ष 2022 में देहरादून की एक निजी यूनिवर्सिटी में एलएलबी की पढ़ाई करने आया था। आरोप है कि पढ़ाई के दौरान उसने दिल्ली और हरियाणा से शराब लाकर बिधौली और प्रेमनगर क्षेत्र के हॉस्टल व पीजी में रहने वाले छात्र-छात्राओं को सप्लाई करना शुरू किया।
धीरे-धीरे इस गतिविधि का दायरा बढ़ता गया। ग्राहकों तक सीधे पहुंच, ऑर्डर के लिए वाट्सऐप और डिलीवरी के लिए युवाओं की टीम ने कथित कारोबार को संगठित रूप दे दिया। इसी दौरान गर्वित ने बिधौली क्षेत्र में तीन ढाबे 'ऑल राउंडर चाचा' नाम से शुरू किए। बाद में उसका परिवार भी हरियाणा से देहरादून आकर रहने लगा।
आबकारी विभाग का आरोप है कि गर्वित हरियाणा और चंडीगढ़ से शराब लाकर देहरादून में सप्लाई करता था। आठ अक्टूबर को बरामद शराब की बोतलों पर 'फॉर सेल इन चंडीगढ़ ओनली' अंकित होना भी जांच का अहम पहलू है। विभाग शराब की खरीद के स्रोत और उसकी वैधता की जांच कर रहा है।
