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बांसुरी स्वराज ने देहरादून में परखी भाजपा की सियासी ताकत, 2027 चुनाव की तैयारी

Published: Fri, 09 Oct 2026 12:04 AM (IST)

भाजपा की सह-प्रभारी बांसुरी स्वराज ने देहरादून में अपने स्वागत समारोह के दौरान महानगर की राजनीतिक स्थिति और नेताओं के ...और पढ़ें

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HighLights

  1. बांसुरी स्वराज ने देहरादून भाजपा की राजनीतिक स्थिति का आकलन किया।

  2. 2027 विधानसभा चुनावों के लिए संगठन की जमीनी हकीकत परखी।

  3. पांच सीटों पर टिकट दावेदारों और खेमों की सक्रियता देखी।

अंकुर अग्रवाल, जागरण देहरादून। स्वागत के लिए जुटी भाजपा महानगर की भीड़ में बांसुरी स्वराज सिर्फ चेहरे नहीं देख रही थीं, बल्कि संगठन का संतुलन पढ़ रही थीं। किस नेता के साथ कौन खड़ा है, किसकी मौजूदगी के पीछे कितना राजनीतिक वजन है और किसका प्रभाव संगठन की चौखट से निकलकर बूथ तक जाता है, गुरुवार के स्वागत एवं संवाद में भाजपा की प्रदेश सह-प्रभारी बांसुरी की नजर इन बारीकियों पर टिकी रही।

कार्यक्रम औपचारिक था, लेकिन समय चुनावी है। इसलिए फूल मालाओं व गुलदस्तों के बीच भी 2027 की टिकट राजनीति और शक्ति-संतुलन की परछाइयां साफ दिखीं।

बांसुरी स्वराज उत्तराखंड में नई चुनावी टीम का हिस्सा हैं व पार्टी ने उन्हें 2027 की तैयारी में संगठन की जमीनी स्थिति समझने की जिम्मेदारी के साथ मैदान में उतारा है। उनके पहले प्रवास में ही संगठन की एकजुटता, बूथ तक पहुंच व अंतर्कलह से बचने को लेकर संदेश सामने आ चुका है।

ऐसे में देहरादून महानगर का यह कार्यक्रम उनके लिए केवल स्वागत नहीं, राजनीतिक चेहरे पढ़ने का एक और मौका था। कार्यक्रम भले ही समाप्त हो गया लेकिन बांसुरी के लिए महानगर की 'राजनीतिक किताब' का पहला पन्ना खुल गया। टिकट की दावेदारी के बीच हर बड़ा चेहरा अपनी जगह तलाशता रह और हर खेमा अपना प्रभाव दिखाने का प्रयास करता रहा।

पांच सीटों की राजनीति में हर चेहरा मायने रखता है

राजपुर रोड, धर्मपुर, रायपुर, कैंट और मसूरी। महानगर की पांच विधानसभा सीटें। पांच सीटें, पांच स्थानीय समीकरण और टिकट की संभावित दौड़ में कई राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं। चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन टिकट की राजनीति कभी चुनाव कार्यक्रम जारी होने का इंतजार नहीं करती।

मौजूदा विधायकों के सामने अपनी पकड़ कायम रखने की चुनौती है तो संभावित दावेदारों के लिए अपनी ताकत दर्ज कराने का वक्त। यही वह जगह है जहां बांसुरी की निगाह सबसे ज्यादा ठहरी, यानी चेहरे पर नहीं, चेहरे के पीछे खड़े समूह पर।

मंच पर मौजूदगी से ज्यादा पढ़े गए समीकरण

गुरुवार को मंच पर मंत्री, विधायक, प्रदेश पदाधिकारी और महानगर संगठन के नेता एक साथ थे। यह भाजपा के किसी बड़े कार्यक्रम की सामान्य तस्वीर भी हो सकती थी, मगर चुनावी समय में तस्वीरें भी राजनीतिक भाषा बोलती हैं।

कौन किसके साथ सहज दिखा, किसके आसपास कार्यकर्ताओं का घेरा रहा, किसकी मौजूदगी महज औपचारिक रही और किसके साथ संगठन मजबूती से खड़ा नजर आया, बांसुरी के सामने यही तस्वीर थी।

बांसुरी ने पकड़ी सबसे अहम बात

महानगर भाजपा की सबसे बड़ी चुनौती टिकट की संभावित प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धा को संगठन की एकजुटता में बनाए रखना मानी जा रही। दावेदारियां होंगी तो खेमे भी सक्रिय होंगे, खेमे सक्रिय होंगे तो शक्ति-संतुलन बदलेगा और शक्ति-संतुलन बदलेगा तो संगठन के भीतर असहजता की गुंजाइश भी बनेगी।

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