देहरादून के विज्ञानी का बड़ा दावा: ब्रह्मांड का हर कण एक ही डार्क मैटर से बना, जरूरी है Dark Energy
पूर्व विज्ञानी जेएस रावत ने ब्रह्मांड की मूल संरचना पर नई परिकल्पना पेश की है, जिसमें एक ही अत्यंत सूक्ष्म ...और पढ़ें

डार्क एनर्जी को अनावश्यक बताया और चारों मूलभूत बलों को एक ही शक्ति की अभिव्यक्ति बताया।

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सुमन सेमवाल, देहरादून। जिस कारण गुरुत्वाकर्षण बल पैदा होता है, उस अदृश्य डार्क मैटर को लेकर देहरादून निवासी और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के पूर्व विज्ञानी जेएस रावत ने बड़ा दावा पेश किया है। इसके साथ ही ब्रह्मांड की मूल संरचना को लेकर भी नई सैद्धांतिक परिकल्पना सामने रखी है।
इंटरनेशनल जर्नल आफ साइंस एंड रिसर्च में हाल में प्रकाशित जेएस रावत के शोध पत्र में दावा किया गया है कि पदार्थ, ऊर्जा, अंतरिक्ष और मूलभूत बलों की अंतिम इकाई एक ही अत्यंत सूक्ष्म डार्क मैटर कण (डीएमपी) है। जीएस रावत के अनुसार परमाणु से लेकर तारे और आकाशगंगाएं तक इसी कण के अलग-अलग सामूहिक रूप हैं।
प्रोटान भी मूलभूत नहीं है
विज्ञानी रावत के अनुसार प्रोटान, न्यूट्रान और इलेक्ट्रान मूलभूत कण नहीं हैं। बड़ी संख्या में डीएमपी एक साथ संघनित होकर बोस-आइंस्टीन संघनित समूह बनाते हैं और सामान्य पदार्थ का रूप लेते हैं। शोधपत्र में एक प्रोटान जैसे समूह में 1 के बाद 28 से 31 शून्य तक डीएमपी होने का अनुमान है।
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एक स्वतंत्र डीएमपी का द्रव्यमान एक इलेक्ट्रान-वोल्ट के 10 लाख करोड़ करोड़वें हिस्से से भी बहुत कम से लेकर एक इलेक्ट्रान-वोल्ट के एक हजारवें हिस्से तक बताया गया है।
वहीं, मुक्त डीएमपी की पारस्परिक क्रिया का क्षेत्र 10 की घात माइनस 70 वर्ग मीटर से भी कम बताया गया है। इसलिए उनके अनुसार इन्हें सीधे पकड़ना कठिन है। हालांकि, वैश्विक वैज्ञानिक शोध में डार्क मैटर का वास्तविक कण अभी सीधे मिला ही नहीं है।
चारों बलों के पीछे एक शक्ति
शोध गुरुत्वाकर्षण, विद्युतचुंबकीय, प्रबल नाभिकीय और दुर्बल नाभिकीय बल को अलग-अलग मूलभूत शक्तियां नहीं मानता। इन्हें सुपरग्रैविटेशनल तरंग की अलग-अलग अभिव्यक्तियां बताया गया है। इसमें अनंत अंतरिक्ष के भीतर सीमित ब्रह्मांडीय ‘बुलबुले’, उसकी सीमा पर तरंग की झिल्ली और ‘रावत स्थिरांक’ के रूप में प्रतिपादित करने का प्रस्ताव भी दिया गया है।
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ब्रह्मांड फैल नहीं रहा, मूल स्वरूप में लौट रहा
जेएस रावत के अध्ययन में सबसे बड़ा दावा ‘बैकवर्ड डायरेक्शन प्रिंसिपल’ है। रावत के अनुसार आकाशगंगाएं हमसे दूर नहीं भाग रहीं, बल्कि किसी केंद्रीय ‘स्रोत’ की ओर लौट रही हैं। लाल विस्थापन को वे इसी प्रक्रिया से जोड़ते हैं और कहते हैं कि केवल लाल विस्थापन के आधार पर विस्तार को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता।
इसी आधार पर उनका शोधपत्र डार्क एनर्जी को अनावश्यक बताता है। दूसरी तरफ सामान्य वैज्ञानिक समझ में हालांकि डार्क मैटर के गुरुत्वीय प्रभावों के मजबूत प्रमाण हैं और डार्क एनर्जी को ब्रह्मांड के त्वरित विस्तार से जोड़ा जाता है।
