जागरण संवाददाता, देहरादून। उत्तराखंड राज्य निर्माण के आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण की प्रक्रिया पर उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने जिला प्रशासन के साथ हुई बैठक में मंच पदाधिकारियों ने चिन्हीकरण की प्रक्रिया में बदलाव करने की मांग की।

मुख्यमंत्री पद का दायित्व संभालने के बाद पुष्कर सिंह धामी ने आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण और आश्रित संबंधी शासनादेश जारी कराया। इसी क्रम में आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण को लेकर जिला प्रशासन ने आंदोलनकारियों के साथ पहली बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर आंदोलनकारी मंच के जिलाध्यक्ष प्रदीप कुकरेती ने कहा कि चिन्हीकरण के लिए केवल जेल जाने व घायलों की पुष्टि को ही आधार माना गया है। यह स्थिति सही नहीं है और तमाम ऐसे सक्रिय आंदोलनकारी भी रहे, जो न तो जेल गए और न ही घायल हुए।

लिहाजा, चिह्ननीकरण के लिए स्थानीय अभिसूचना इकाई (एलआइयू) की रिपोर्ट को भी आधार बनाया जाना चाहिए। हालांकि, अपर जिलाधिकारी डा. एसके बरनवाल नियमों का हवाला देते रहे। यही वजह रही कि ढाई घंटे की बैठक में महज आठ आंदोलनकारियों का चिन्हीकरण किया जा सके। मंच ने कहा कि वह नियमों में शिथिलता को लेकर मुख्य सचिव व मुख्यमंत्री से मुलाकात करेंगे। इस अवसर पर विभिन्न उपजिलाधिकारी, जेल कार्मिक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों समेत ओमी उनियाल, जगमोहन सिंह नेगी, विवेकानंद खंडूड़ी, जितेंद्र अंथवाल, सरोज डिमरी, उर्मिला शर्मा आदि उपस्थित रहे।

पुरानी पेंशन के लिए 12 को सचिवालय कूच

पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर कार्मिक 12 नवंबर को सचिवालय कूच करेंगे। पुरानी पेंशन बहाली राष्ट्रीय आंदोलन (एनएमओपीएस) उत्तराखंड के आह्वान पर कार्मिकों ने रैली निकालने का निर्णय लिया है। एनएमओपीएस के जिला महामंत्री प्रवेश सेमवाल ने कहा कि एक अक्टूबर 2005 से सरकारी सेवा में नियुक्त कर्मचारियों-अधिकारियों की पुरानी पेंशन योजना को समाप्त कर नई पेंशन योजना लागू कर दी गई थी, जिसका कार्मिक लगातार विरोध कर रहे हैं। पर, सरकार इसमें गंभीरता नहीं दिखा रही है। प्रदेश के मान्यता प्राप्त संगठनों की ओर से यह निर्णय लिया गया है कि 12 नवंबर को देहरादून में विशाल रैली आयोजित की जाएगी, जिसके तहत परेड मैदान से सचिवालय कूच कर मांग को पुरजोर तरीके से उठाया जाएगा।

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Edited By: Raksha Panthri