जागरण संवाददाता, ऋषिकेश। गीता भवन स्वर्गाश्रम की ओर से संचालित औषधालय निर्माणशाला से हटाए गए 10 कर्मचारी एक बालक के साथ बहाली समेत अन्य मांग को लेकर आश्रम परिसर में बने ओवरहेड टैंक पर चढ़ गए। प्रशासन, प्रबंधन और पुलिस ने उतारने की कोशिश की। लेकिन कर्मचारियों ने ठोस आश्वासन मिले बिना उतरने से इन्कार कर दिया। देररात तक भी कर्मचारियों को नहीं उतारा जा सका था। 

गीता भवन औषधि निर्माणशाला को सिडकुल हरिद्वार शिफ्ट कर दिया गया है। जिसके बाद यहां कार्यरत 32 कर्मचारियों को निकाल दिया गया था। पिछले दो वर्ष से कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच इस बात को लेकर गतिरोध बना हुआ है। शुक्रवार को औषधि निर्माणशाला से निकाले गए मनोरंजन पासवान, ललित पासवान, राम उत्तम पासवान, मानव राय, कमल राय, प्रमोद यादव, भोला यादव, विजेंद्र कुमार, बहादुर पासवान, ललित पासवान एक ओवरहेड वाटर टैंक पर चढ़ गए।

बहादुर पासवान के साथ उसका 10 वर्षीय पुत्र सुधांशु भी टंकी पर चढ़ गया। लक्ष्मणझूला थानाध्यक्ष वीरेंद्र रमोला पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने टंकी पर चढ़े कर्मचारियों से उतरने का आग्रह किया गया। मगर, उन्होंने मांग पूरी न होने तक किसी भी सूरत में टंकी से नीचे उतरने से इन्कार कर दिया है। कर्मचारियों ने काम पर बहाल करने, 16 दिसंबर 2020 से रुका हुआ वेतन तथा श्रम कानून के मुताबिक अन्य देयकों का भुगतान करने की मांग की।

तहसीलदार सरदार मनजीत सिंह व श्रम अधिकारी पौड़ी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने भी कर्मचारियों से वार्ता की। मगर, वह अपनी मांग पर अड़े रहे। दोपहर बाद गीता भवन के प्रबंधक वीके राय भी वार्ता के लिए पहुंचे। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों का समाधान उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। यह मामला श्रम न्यायालय में विचाराधीन है। 

इस बात को लेकर नगर पंचायत अध्यक्ष माधव अग्रवाल, संजय अग्रवाल व अन्य मौजूद जनप्रतिनिधियों के साथ उनकी तीखी नोकझोंक भी हुई। श्रम अधिकारी ने कहा कि संबंधित मामले की 12 नवंबर को सुनवाई की जानी है। उन्होंने तब तक कर्मचारियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की। फिलहाल रात्रि नौ बजे तक इस मामले में कोई हल नहीं निकल पाया था और सभी 11 लोग पानी की टंकी पर ही डटे हुए थे।

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Edited By: Sunil Negi