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कांवली रोड का पता, बागपत का छात्र... फर्जी प्रमाण पत्र से हासिल की एमबीबीएस सीट

Published: Wed, 07 Oct 2026 03:47 PM (GMT+05:30)

बागपत के एक छात्र ने दून का पता दिखाकर फर्जी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र से एमबीबीएस सीट पाई, ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, देहरादून। बागपत के एक छात्र ने दून के कांवली रोड का पता दिखाकर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाया और इसी के आधार पर एमबीबीएस की सीट हासिल कर ली। मामला खुलने के बाद एचएनबी उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने छात्र एलिश तोमर का सीट आवंटन रद कर दिया है।

डीएम देहरादून की रिपोर्ट के आधार पर विवि ने यह कार्रवाई की। छात्र को हल्द्वानी में एमबीबीएस की सीट मिली थी। एसआइटी की जांच में उसके बागपत का होने की बात सामने आई है। प्रमाण पत्र फर्जी मिलने पर बीते दिनों उसके खिलाफ वसंत विहार थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था।

अब एसआइटी पूरे मामले की पड़ताल कर रही है। जांच में यह देखा जा रहा है कि देहरादून का पता दिखाकर प्रमाण पत्र कैसे तैयार हुआ और इसके आधार पर छात्र को मेडिकल सीट कैसे मिल गई।

778 प्रमाण पत्र जांच के घेरे में

मेडिकल दाखिलों में दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर विश्वविद्यालय ने इस बार व्यापक जांच शुरू की है। एमबीबीएस और बीडीएस में दाखिला लेने वाले छात्रों के 778 प्रमाण पत्र संबंधित जिलों को सत्यापन के लिए भेजे गए हैं। इनमें निवास, जाति और आरक्षण समेत विभिन्न श्रेणियों के प्रमाण पत्र शामिल हैं।

जिलों से मिल रही रिपोर्ट के आधार पर अब तक 20 दाखिले रद किए जा चुके हैं। इनमें चार मामले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे के हैं। यानी इस कोटे में यह चौथा मामला है, जिसमें सत्यापन के बाद अभ्यर्थी की सीट रद की गई है।

विवि के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल ने बताया कि 778 प्रमाण पत्र जिलों को जांच के लिए भेजे गए हैं। विभिन्न जिलों से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर सीट रद की जा रही है। आगे भी जैसे-जैसे रिपोर्ट मिलेगी कार्रवाई की जाएगी। सभी प्रमाण पत्रों की सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद तस्वीर और साफ होगी।

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पेंशन पट्टा नहीं, फिर भी बन रहे स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र

देहरादून: एमबीबीएस फर्जीवाड़े के बाद स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। इस व्यवस्था को और पारदर्शी व पुख्ता करने की मांग की गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा ने मंगलवार को प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि एमबीबीएस दाखिलों में ऐसे प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल को लेकर 370 संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची चिकित्सा शिक्षा मंत्री को सौंपी गई थी, पर अब तक सभी मामलों की जांच नहीं हो पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व के एक शासनादेश के प्राविधानों की गलत व्याख्या कर राज्य से 10वीं-12वीं पास अभ्यर्थियों को भी मेडिकल काउंसलिंग में शामिल किया जा रहा है।

कार्मिक विभाग के सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी राजेंद्र प्रसाद जोशी ने कहा कि 10वीं-12वीं की योग्यता से जुड़ा संबंधित प्राविधान केवल समूह ‘ग’ की भर्ती के लिए लागू होता है। इसका मेडिकल दाखिलों में इस्तेमाल किया जाना नियमों की गलत व्याख्या है। अभिभावक सत्यप्रकाश चौहान ने प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र बनने में सामान्य तौर पर सात-आठ माह लगते हैं। इसके लिए कई स्तरों पर जांच होती है। इसके बावजूद व्यवस्था में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर बिना पेंशन पट्टा के भी कथित तौर पर प्रमाण पत्र जारी किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि प्रमाण पत्र जारी करने से पहले इतनी लंबी प्रक्रिया और कई स्तर की जांच होती है, तो फर्जी प्रमाण पत्र व्यवस्था में कैसे पहुंच रहे हैं, इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

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उन्होंने प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने, पुराने प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराने और खामियां दूर करने की मांग की। इस दौरान महिपाल सिंह, भूपेंद्र कंडारी, प्रेम खन्ना, आशुतोष गेरौला, भारत सिंह नेगी और महिपाल सिंह रावत आदि मौजूद रहे।