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एक प्रमाणपत्र... दो नाम! एमबीबीएस दाखिलों में दस्तावेजों ने खोली पोल

Published: Fri, 02 Oct 2026 11:06 PM (IST)

एमबीबीएस दाखिलों में राज्य कोटे के दस्तावेजों पर सवाल उठे हैं, जिसमें एक ही प्रमाणपत्र संख्या दो नामों से जुड़ी ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, देहरादून। एमबीबीएस दाखिलों में राज्य कोटे के लिए लगाए गए दस्तावेजों की जांच के बीच नए सवाल सामने आए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा ने शुक्रवार को प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता कर हरिद्वार मेडिकल कालेज में दाखिला लेने वाले एक अभ्यर्थी के स्थायी निवास प्रमाणपत्र और दूसरे अभ्यर्थी के ओबीसी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसके लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने की मांग की।

एक प्रमाणपत्र संख्या, दो नाम

बहुगुणा ने बताया कि हरिद्वार मेडिकल कालेज में राज्य कोटे के तहत एमबीबीएस सीट पाने वाले एक अभ्यर्थी ने स्थायी निवास प्रमाणपत्र लगाया था। उनके अनुसार, अपणि सरकार पोर्टल पर प्रमाणपत्र संख्या के आधार पर जांच करने पर यही प्रमाणपत्र ऊखीमठ की एक युवती का मिला।

बहुगुणा ने कहा कि एक ही प्रमाणपत्र संख्या का दो अलग नामों से जुड़े दस्तावेजों में सामने आना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने संबंधित प्रमाणपत्र का मूल सरकारी रिकार्ड से मिलान कराने की मांग की है।

प्रमाणपत्र जारी होने से पहले सीट आवंटन

बहुगुणा ने बताया कि एक अन्य मामले में उत्तर प्रदेश के एक अभ्यर्थी ने ओबीसी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे में एमबीबीएस सीट के लिए आवेदन किया था। उसे हिमालयन इंस्टीट्यूट में सीट आवंटित भी कर दी गई।

बहुगुणा के अनुसार, संबंधित प्रमाणपत्र के लिए अभ्यर्थी ने चमोली के नारायणबगड़ में सितंबर में आवेदन किया था, जबकि सीट आवंटन के समय तक प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ था। उन्होंने आवेदन, प्रमाणपत्र जारी होने और सीट आवंटन की तारीखों का मिलान कराने की मांग की।

एसआइटी जांच का दायरा सीमित

बहुगुणा ने एसआइटी की जांच के दायरे पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि इतने बड़े स्तर पर दस्तावेजों पर सवाल उठने के बावजूद जांच सिर्फ पांच मामलों तक सीमित रखने का आधार स्पष्ट किया जाना चाहिए। उन्होंने 370 अभ्यर्थियों की सूची चिकित्सा शिक्षा मंत्री को सौंपी थी।

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इसमें राज्य कोटे में दाखिले की पात्रता और दस्तावेजों की जांच की जरूरत बताई गई थी। पर इस पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। बहुगुणा के अनुसार, विश्वविद्यालय 778 प्रमाणपत्रों की जांच की बात कर रहा है, लेकिन यह सूची डाक के माध्यम से संबंधित जिलों को भेजी गई है।

उन्होंने आरोप लगाया कि इससे मामला केवल लटक रहा है। उनका यह भी कहना है कि अब प्रकरण को सीबीसीआइडी को देने की तैयारी की जा रही है, लेकिन यह भी मामले को लटकाने का प्रयास हो सकता है।

दावा किया कि यही सूची कुमाऊं कमिश्नर को सौंपे जाने पर वहां बड़े स्तर पर कार्रवाई हुई और कई फर्जी प्रमाणपत्र निरस्त किए गए। बहुगुणा ने प्रदेश स्तर पर जांच समिति गठित कर सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षतामें जांच कराने की मांग की।

दसवीं-बारहवीं के आधार पर राज्य कोटा

बहुगुणा ने नीट-यूजी स्टेट काउंसिलिंग के नियमों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि उत्तराखंड से 10वीं और 12वीं करने वाला अभ्यर्थी स्थायी निवास प्रमाणपत्र के बिना भी काउंसलिंग में शामिल होकर राज्य कोटे की सीट के लिए दावा कर सकता है, हालांकि उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।

उन्होंने सवाल उठाया कि केवल राज्य में पढ़ाई करने के आधार पर राज्य कोटे की सीट पाने की पात्रता कितनी उचित है। ऐसे अभ्यर्थियों के 10वीं-12वीं के प्रमाणपत्रों की भी जांच की मांग की। इधर, विवि प्रशासन ने शासनादेश का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड से 10वीं और 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी राज्य कोटे में प्रतिभाग कर सकते हैं। यही नियम समूह ''''ग'''' की परीक्षा और भर्ती के लिए भी लागू है।

15 से अधिक सदस्यों वाला बोर्ड करता है सीट आवंटन: विवि

चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो, विजय जुयाल ने कहा कि प्रथम व द्वितीय चरण में प्रवेशित और फ्लोट सभी अभ्यर्थियों के मूल अभिलेख संबंधित जिलों को ई-मेल और डाक से जांच के लिए भेजे गए हैं।

जिलों से प्राप्त जांच आख्या के आधार पर अब तक 19 अभ्यर्थियों के आवंटन निरस्त किए जा चुके हैं। यह स्पष्ट किया कि सीट आवंटन किसी व्यक्ति विशेष, परीक्षा नियंत्रक या पदाधिकारी द्वारा नहीं होता।

15 से अधिक सदस्यों वाला काउंसलिंग बोर्ड यह प्रक्रिया संचालित करता है। आनलाइन आवेदन में अभ्यर्थी के दावों के आधार पर सीट आवंटित होती है। प्रवेश के समय संस्थान और बाद में जिला प्रशासन मूल अभिलेखों की जांच करता है। प्रवेशित, फ्लोट और निरस्त अभ्यर्थियों की सूची काउंसिलिंग वेबसाइट पर भी प्रदर्शित की गई है।