MBBS दाखिला फर्जीवाड़ा: 20 घंटे की पूछताछ में रूपेश पंडित ने पुलिस को किया गुमराह
एसआइटी ने एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपित रूपेश पंडित से 20 घंटे पूछताछ की, जिसमें उसने पुलिस को उलझाने ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, देहरादून। स्वतंत्रता सेनानी आश्रित के फर्जी प्रमाण पत्र से एमबीबीएस में दाखिले के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह की कड़ियां जोड़ने में जुटी एसआइटी को मुख्य आरोपित रूपेश पंडित से करीब 20 घंटे की पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं।
हालांकि, पूछताछ के दौरान रूपेश लगातार पुलिस को उलझाता रहा। बताया जा रहा है कि वह एक सवाल का जवाब देने में करीब 10 मिनट का समय लेता रहा था और पूछे गए सवालों को घुमा-फिराकर गिरोह के अन्य सदस्यों पर डालने का प्रयास करता रहा। एसआइटी अब उसके बयानों का मिलान मोबाइल से मिले साक्ष्यों, वाट्सऐप चैट और बैंक खातों के लेनदेन से कर रही है।
पुलिस के अनुसार एमबीबीएस एडमिशन के नाम पर अभ्यर्थियों और उनके स्वजन से संपर्क कर रकम लेने का पूरा खेल योजनाबद्ध तरीके से चलाया जा रहा था। गिरोह के सदस्य अधिकांश बातचीत वाट्सएप के माध्यम से ही करते थे।
एडमिशन और फीस से जुड़ी डील भी वाट्सएप पर तय किए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद रकम नकद लेने की जानकारी भी पुलिस जांच में सामने आई है। ऐसे में एसआइटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने अब तक कितने छात्रों से संपर्क किया और कितनी रकम का लेनदेन किया।
वाट्सएप चैट से खुल रहे कई राज
जांच के दौरान आरोपितों के मोबाइल पुलिस ने कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिए हैं। प्रारंभिक स्तर पर वाट्सएप चैट में कई ऐसे संवाद सामने आए हैं, जिनसे एडमिशन के नाम पर की जा रही बातचीत और गिरोह के सदस्यों के बीच संपर्क की कड़ियां जुड़ने की उम्मीद है।
पुलिस चैट, काल डिटेल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर रही है। एसआइटी की जांच का फोकस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि रूपेश के अलावा इस फर्जीवाड़े में कौन-कौन लोग शामिल थे और उनकी भूमिका क्या थी।
इसके साथ ही छात्रों तक पहुंच बनाने, मेडिकल कालेजों में दाखिले का झांसा देने और रकम वसूलने की प्रक्रिया में शामिल लोगों की पहचान की जा रही है।
नकद रकम लेने से बढ़ी जांच की चुनौती
पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि एडमिशन के नाम पर फीस की रकम नकद लेने का तरीका अपनाया जाता था। इससे लेनदेन की कड़ियों को जोड़ना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसके बावजूद एसआइटी आरोपितों के बैंक खातों की जांच कर रही है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि नकद लेनदेन के अलावा कहीं बैंक खातों के माध्यम से भी रकम का ट्रांसफर तो नहीं हुआ। संदिग्ध खातों और उनसे जुड़े लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।
सीएचसी सेंटर की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच के दौरान सीएचसी सेंटर से जुड़े पहलू भी सामने आए हैं। हालांकि, अभी तक इस सेंटर की वास्तविक भूमिका और गिरोह से उसका संबंध पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है। एसआइटी इससे जुड़े दस्तावेज और अन्य जानकारियां जुटा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आने वाले प्रत्येक तथ्य का स्वतंत्र रूप से सत्यापन किया जा रहा है।
बयानों का साक्ष्यों से मिलान
पूछताछ के दौरान रूपेश पंडित ने कई सवालों के जवाब सीधे देने के बजाय उन्हें अन्य आरोपितों की भूमिका से जोड़ने का प्रयास किया। पुलिस अब उसके बयानों को अंतिम सत्य मानने के बजाय डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों से मिलान कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार मोबाइल फारेंसिक रिपोर्ट आने के बाद जांच को और दिशा मिल सकती है। करीब 20 घंटे की पूछताछ पूरी होने के बाद पुलिस ने बुधवार दोपहर रूपेश पंडित को न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
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अब एसआइटी गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका और नेटवर्क की गहराई खंगालने में जुटी है। पुलिस का जोर इस बात पर है कि एमबीबीएस दाखिले के नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े से जुड़े सभी लोगों तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
