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एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़ा: स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के साथ अब ओबीसी प्रमाणपत्र भी फर्जी

Published: Sun, 27 Sep 2026 02:57 PM (IST)

देहरादून में एमबीबीएस दाखिले में फर्जीवाड़े की जांच में नए खुलासे हुए हैं। एसआईटी ने पाया है कि कुछ अभ्यर्थियों ...और पढ़ें

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जागरण संवाददाता, देहरादून। एमबीबीएस दाखिले में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के नाम पर कथित फर्जीवाड़े की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे गिरोह के काम करने के तरीके की नई परतें सामने आ रही हैं। जांच में अब यह पहलू भी सामने आया है कि आरोपितों ने कुछ अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए ओबीसी श्रेणी के प्रमाणपत्र भी फर्जी तैयार किए थे।

इसके जरिए अभ्यर्थियों को ओबीसी और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित, दोनों श्रेणियों का लाभ दिलाने की कोशिश किए जाने की आशंका है।

एसआइटी की जांच में सामने आए तथ्यों के मुताबिक, गिरोह अभ्यर्थियों की तलाश से लेकर उनके लिए विभिन्न श्रेणियों के प्रमाणपत्र तैयार कराने और दाखिले की प्रक्रिया में मदद करने तक काम कर रहा था। पहले स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी सामने आई थी। अब ओबीसी प्रमाणपत्रों का मामला सामने आने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है।

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दो कोटे का लाभ लेने की थी तैयारी
एसआइटी इस बात की पड़ताल कर रही है कि फर्जी ओबीसी प्रमाणपत्र किन अभ्यर्थियों के लिए तैयार कराए गए और उनका इस्तेमाल एमबीबीएस दाखिले में किस स्तर पर किया गया। आशंका यह भी है कि कुछ अभ्यर्थियों को एक से अधिक आरक्षित श्रेणियों का लाभ दिलाने की रणनीति बनाई गई थी।

स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान सामने आए दस्तावेजों में पहले ही कई गंभीर विसंगतियां मिली हैं। दाखिलों के चार मामलों में इस्तेमाल किए गए पीपीओ नंबर संदिग्ध पाए गए हैं। एक ही पीपीओ नंबर का इस्तेमाल कई अभ्यर्थियों के दस्तावेजों में किए जाने की बात भी जांच में सामने आई है। इसके अलावा कुछ तम्रपत्रों में स्वतंत्रता सेनानी का नाम तक नहीं होने से दस्तावेजों की सत्यता पर सवाल उठे हैं।

खातों में लेनदेन के बड़े मामले आए सामने

एसआइटी अब गिरफ्तार आरोपितों के बैंक खातों की जांच कर रही है। रूपेश पंडित और अरविंद कुमार के खातों की जांच के दौरान लेनदेन से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि खातों में किन लोगों से रकम आई और किन लोगों को भुगतान किया गया। यदि इन लेनदेन का संबंध अभ्यर्थियों के दाखिले या फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने से जुड़ता है तो जांच में शामिल लोगों की संख्या बढ़ सकती है।

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एसआइटी यह भी पता लगा रही है कि गिरोह में कौन व्यक्ति अभ्यर्थियों की तलाश करता था, कौन प्रमाणपत्र तैयार कराने की व्यवस्था करता था और दाखिले की प्रक्रिया में किसकी भूमिका रहती थी। मोबाइल फोन एफएसएल भेजे जाने के बाद डिजिटल साक्ष्यों से भी आरोपितों के संपर्क और लेनदेन की जानकारी जुटाई जा रही है।