एमबीबीएस दाखिला फर्जीवाड़ा: बाजपुर में फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले में तीन पर मुकदमा, जांच शुरू
बाजपुर पुलिस ने कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जाति प्रमाणपत्र बनवाने के आरोप में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।


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संवाद सहयोगी, बाजपुर। कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जाति प्रमाणपत्र बनवाकर उसका लाभ लेने के मामले में बाजपुर कोतवाली पुलिस ने तीन लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी पंजीकृत की है। पुलिस ने यह कार्रवाई राजस्व उपनिरीक्षक क्षेत्र मुड़िया कला जानकी प्रसाद द्विवेदी की तहरीर पर की है।
मामला उत्तराखंड के विभिन्न मेडिकल कालेजों में शिक्षारत छात्रों के दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान सामने आया। जिलाधिकारी कार्यालय से 24 सितंबर को जारी पत्र के साथ प्राप्त सूची में शामिल प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान तहसील बाजपुर क्षेत्र के मुड़िया पिस्तौर निवासी अलसमी फाजिल पुत्र तौफिक अहमद के नाम से जारी जाति प्रमाणपत्र संख्या UK24E50800351374 संदिग्ध पाया गया।
यह प्रमाणपत्र 28 दिसंबर 2024 को जारी हुआ था। प्रमाणपत्र के लिए आवेदन के साथ नगर पालिका परिषद बाजपुर के नाम से गृहकर संबंधी एक प्रमाणपत्र लगाया गया था। जांच में नगर पालिका परिषद के अभिलेखों में इस प्रमाणपत्र का कोई रिकार्ड नहीं मिला। पालिका के 25 सितंबर के पत्र के अनुसार वार्ड नंबर पांच मुड़िया पिस्तौर के वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक के डिमांड रजिस्टर में रफीक अहमद पुत्र फकीर मोहम्मद के नाम पर कोई गृहकर दर्ज नहीं है।
पालिका ने यह भी स्पष्ट किया कि आवेदन में लगाया गया एक जनवरी 2024 का गृहकर प्रमाणपत्र उसके कार्यालय से जारी ही नहीं किया गया था। जांच में उसके साथ लगी गृहकर रसीद भी कूटरचित व फर्जी पाई गई। तहरीर के अनुसार मामले में आवेदक के पिता तौफिक अहमद से पूछताछ कर बयान दर्ज किए गए। उन्होंने बताया कि उनका परिवार वर्ष 2005 से पहले ग्राम असालतपुर, तहसील स्वार, जिला रामपुर (उत्तर-प्रदेश) में रहता था।
वर्तमान में परिवार उत्तराखंड में निवास कर रहा है। उन्होंने बताया कि अलसमी फाजिल का जाति प्रमाणपत्र रवि नामक व्यक्ति निवासी महेशपुरा के माध्यम से बनवाया गया था, जिसके लिए छह हजार रुपये दिए गए थे। आरोप है कि रवि ने अपने स्तर से अभिलेख तैयार कर करीब एक माह के भीतर जाति प्रमाणपत्र बनवाकर उपलब्ध कराया।
तौफिक अहमद ने पुलिस को दिए बयान में यह भी बताया कि प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लगाए गए फर्जी दस्तावेजों के संबंध में उन्हें जानकारी नहीं थी और प्रमाणपत्र जारी कराने के लिए वह तहसील के किसी कर्मचारी या अधिकारी से नहीं मिले। जांच के बाद संबंधित जाति प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया गया है।
राजस्व उपनिरीक्षक जानकी प्रसाद द्विवेदी की तहरीर पर पुलिस ने प्रमाणपत्र धारक अलसमी फाजिल, उसके पिता तौफिक अहमद तथा महेशपुरा निवासी रवि के विरुद्ध कूटरचित दस्तावेज तैयार करने, उनका इस्तेमाल करने तथा फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लाभ लेने के आरोप में प्राथमिकी पंजीकृत कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
