उत्तराखंड के सैकड़ों किसानों की सम्मान निधि बंद, अधूरा बंदोबस्त बना परेशानी का सबब
देहरादून के बालावाला में अधूरा बंदोबस्त सैकड़ों किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है, जिससे उनकी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि अटक गई है।

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जागरण संवाददाता, देहरादून। बालावाला में वर्षों से अधूरा पड़ा बंदोबस्त किसानों के लिए मुसीबत बन गया है। जमीनों के अभिलेख आनलाइन नहीं होने के कारण क्षेत्र के सैकड़ों किसानों की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि अटक गई है।
कई किसानों को शुरुआत में एक या दो किस्तें मिलीं, लेकिन इसके बाद भुगतान बंद हो गया। वहीं, जमीन की फर्द निकलवाने जैसे सामान्य कामों के लिए भी लोगों को बंदोबस्त कार्यालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
किसान परेशान
पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य धनवीर सिंह राणा के अनुसार, बंदोबस्त की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से किसानों की भूमि का हिस्सा आनलाइन दर्ज नहीं हो पा रहा है। इसके चलते किसान सम्मान निधि की पात्रता के सत्यापन में परेशानी आ रही है और कई किसानों का नाम व्यवस्था में अपात्र के रूप में दर्ज हो रहा है।
उन्होंने बताया कि इस समस्या को लेकर डोईवाला ब्लाक के कृषि अधिकारियों और क्षेत्रीय लेखपाल से कई बार बात की गई। अधिकारियों ने जमीन से जुड़े दस्तावेज आनलाइन नहीं होने को समस्या की वजह बताया है। समस्या सिर्फ सम्मान निधि तक सीमित नहीं है।
जमीन की फर्द और अन्य राजस्व दस्तावेज लेने के लिए भी लोगों को बंदोबस्त कार्यालय के कई चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। राणा का कहना है कि कभी संबंधित पटवारी के उपलब्ध नहीं होने से लोगों का पूरा दिन बर्बाद हो जाता है, लेकिन काम नहीं हो पाता।
किस्तें बंद, किसान लगा रहे दफ्तरों के चक्कर
धनवीर सिंह राणा के मुताबिक, प्रताप सिंह, महेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, भगवान सिंह, हरि सिंह, चंपल सिंह, सुरेश सिंह, महेश सिंह, दिनेश सिंह और राजेंद्र सिंह समेत सैकड़ों किसान सम्मान निधि नहीं मिलने की समस्या से जूझ रहे हैं।
किसानों को यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा कि उनकी किस्तें कब बहाल होंगी। बंदोबस्त पूरा नहीं होने से जमीन के अभिलेखों में हिस्सेदारी का निर्धारण भी प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने सरकार और राजस्व विभाग से बालावाला में बंदोबस्त की प्रक्रिया जल्द पूरी कर जमीन से संबंधित अभिलेख आनलाइन करने की मांग की है।
