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देहरादून के फरार बिल्डर की इंपीरियल वैली में करोड़ों का नया 'खेल', पुलिस जांच में खुलेंगे 5 सवाल

Published: Sun, 27 Sep 2026 04:03 PM (IST)

देहरादून के फरार बिल्डर शाश्वत गर्ग की इंपीरियल वैली परियोजना में 19 भूखंडों के लिए 7.30 करोड़ रुपये लेने और उन्हें दूसरों को बेचने का नया विवाद सामने आया है।

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संक्षेप में पढ़ें

अंकुर अग्रवाल, देहरादून। आर्केडिया हिलाक्स आवासीय सोसाइटी के नाम पर करोड़ों ठगकर परिवार समेत फरार बिल्डर शाश्वत गर्ग से जुड़ी इंपीरियल वैली परियोजना में जमीन के सौदों का एक और बड़ा राज सामने आया है। इस बार विवाद 19 भूखंडों और करीब 7.30 करोड़ रुपये की रकम का है।

दिल्ली की निवासी कारोबारी प्रियदर्शी अशोक व उनके स्वजनों का आरोप है कि उनसे 19 भूखंडों की पूरी कीमत ले ली गई और उनके पक्ष में बिक्री का करार किया गया, लेकिन रजिस्ट्री नहीं की गई। मामला रेरा पहुंचा तो पता चला कि कुछ भूखंड पहले ही दूसरे लोगों को बेचे जा चुके हैं।यानी एक तरफ 19 भूखंडों की पूरी रकम लेने और रजिस्ट्री कराने का दावा किया गया तो दूसरी तरफ रेरा की फाइल में उन्हीं में से कुछ भूखंडों के पहले के विक्रय विलेख दर्ज हैं।

अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक ही भूखंड के लिए अलग-अलग खरीदारों के अधिकार कैसे बने। बता दें कि अक्टूबर 2025 में शाश्वत गर्ग व उनकी पत्नी साक्षी गर्ग के परिवार समेत फरार होने के बाद परियोजना में निवेश करने वाले लोगों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब इसी परियोजना में 19 भूखंड और 7.30 करोड़ रुपये का नया विवाद सामने आने से पुराने मामलों की कड़ियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं।

19 भूखंड, 7.30 करोड़ और रजिस्ट्री अटकी

शिकायत के मुताबिक वर्ष 2024 में प्रियदर्शी अशोक से इंपीरियल वैली में निवेश के लिए संपर्क किया गया। बड़ी संख्या में भूखंड लेने पर उन्हें रियायती दर पर भूखंड उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया। इसके बाद उन्होंने अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ कुल 19 भूखंड लेने का सौदा किया।

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शिकायतकर्ता का दावा है कि इन भूखंडों के एवज में करीब 7.30 करोड़ रुपये की रकम का भुगतान कर दिया गया। इसके बावजूद रजिस्ट्री नहीं हुई। लगातार मांग के बाद भी जब मामला नहीं सुलझा तो दस्तावेजों की पड़ताल शुरू हुई। आरोप है कि जिन भूखंडों के लिए रकम ली जा चुकी थी और जिनके संबंध में बिक्री का करार किया गया था, उनमें से कुछ को बाद में दूसरे लोगों के पक्ष में बेच दिया गया।

रेरा की फाइल में सामने आया पहले का विक्रय

मामले की सुनवाई के दौरान रेरा के समक्ष बिल्डर शाश्वत गर्ग के पार्टनर विकास ठाकुर की ओर से पूर्व में किए गए विक्रय विलेखों का विवरण प्रस्तुत किया गया। आदेश में दर्ज तथ्यों के अनुसार प्रियदर्शी अशोक के आवेदन में शामिल कुछ भूखंड पहले ही अन्य व्यक्तियों के पक्ष में बेचे जा चुके थे। दस्तावेजों में भूखंड संख्या का विक्रय भी दर्ज है।

बताया गया कि ये भूखंड विकास ठाकुर की ओर से एम/एस असगर टेक्सटाइल्स के पक्ष में बेचे गए थे। आदेश के अनुसार इन भूखंडों का आगे विक्रय नहीं हुआ था। अब रेरा यह जांच कर रहा कि 19 भूखंडों में कौन-कौन से भूखंड पहले ही बेचे जा चुके थे, उनके विक्रय की तारीख क्या थी और उस समय शिकायतकर्ताओं से संबंधित भुगतान या करार की स्थिति क्या थी।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा मामला

मामला सामने आने के बाद प्रियदर्शी अशोक और उनके स्वजनों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून प्रमेन्द्र सिंह डोबाल के कार्यालय में लिखित शिकायत दी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जिन भूखंडों के लिए बिक्री करार किया गया था और जिनकी पूरी कीमत का भुगतान किया जा चुका था, उन्हीं में से कुछ भूखंडों को बाद में अन्य लोगों के पक्ष में बेच दिया गया। शिकायतकर्ताओं ने मामले में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है।

पहले से रेरा की रोक, फिर भी सामने आया नया विवाद

इंपीरियल वैली पहले से ही विवादों में है। एक अन्य आवंटी की शिकायत पर गत वर्ष तीन नवंबर रेरा ने परियोजना के भूखंडों की खरीद-फरोख्त और विक्रय विलेख पर रोक लगाई थी।

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भूखंडों के आवंटन, भुगतान, पूर्व विक्रय और अधिकारों को लेकर कई विवाद लंबित होने के कारण यह रोक लगाई गई थी। अब रेरा ने फिर से हुई सुनवाई के बाद रोक जारी रखी। लंबित शिकायतों के अंतिम निस्तारण तक एम/एस असगर टेक्सटाइल्स और विकास ठाकुर किसी भी भूखंड का नया विक्रय विलेख नहीं कर सकेंगे।

विकास ठाकुर की भूमिका पर भी रेरा की टिप्पणी

विकास ठाकुर की ओर से रेरा में कहा गया कि उन्होंने प्रियदर्शी अशोक या संबंधित आवंटियों से कोई रकम नहीं ली और उनके साथ कोई प्रत्यक्ष संविदात्मक संबंध नहीं है।

हालांकि, रेरा ने उपलब्ध दस्तावेजों और 26 अगस्त 2025 की पंजीकृत मुख्तारनामा के आधार पर विकास ठाकुर को परियोजना का सह-भूमिस्वामी और सह-विकासकर्ता माना। रेरा ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी आवंटी से सीधे रकम न लेने या प्रत्यक्ष अनुबंध न होने मात्र से परियोजना से जुड़ी जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। आदेश में विकास ठाकुर को परियोजना के संबंध में संयुक्त एवं पृथक रूप से उत्तरदायी माना गया है।

पहले भी दर्ज हो चुके हैं मुकदमे

इंपीरियल वैली में यह पहला विवाद नहीं है। दिसंबर 2025 में रानीपोखरी थाने में शाश्वत गर्ग, साक्षी गर्ग और विकास ठाकुर के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई थी। इनमें भूखंड का सौदा करने, रकम लेने और रजिस्ट्री नहीं कराने के आरोप लगाए गए थे। एक मामले में 75.51 लाख रुपये लेने के बाद संबंधित भूखंड किसी अन्य व्यक्ति को बेचने का आरोप भी सामने आया था।

पुलिस जांच में खुलेंगे अहम सवाल

- 7.30 करोड़ रुपये का भुगतान किन खातों में और किस तारीख को हुआ?
- 19 में से कौन-कौन से भूखंड पहले ही बेचे जा चुके थे?
- बिक्री करार और पूर्व विक्रय विलेखों की तारीखों में क्या संबंध है?
- एक ही भूखंड से जुड़े अलग-अलग खरीदारों के दस्तावेज किस आधार पर तैयार हुए?
- पूरे लेन-देन में शाश्वत गर्ग, विकास ठाकुर और परियोजना से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका रही?