देहरादून, राज्य ब्यूरो। उत्तराखंड में बगैर कोरोना जांच कराए प्रतिदिन 2000 व्यक्तियों को ही प्रवेश देने की व्यवस्था खत्म कर दी गई है, लेकिन सरकार की चुनौती बढ़ गई है। राज्य में आने के बाद मोबाइल फोन स्विच ऑफ करने के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे 211 व्यक्तियों की ट्रेसिंग में परेशानी हो रही है। सरकार इस समस्या के समाधान के लिए जनजागरूकता अभियान तेज करने पर विचार कर रही है। 

कोरोना संक्रमण के प्रतिदिन बढ़ रहे खतरे के बीच प्रदेश सरकार के लिए पाबंदी में ढील देने के बाद चुनौती खड़ी हो गई। राज्य में प्रवेश करने वाले व्यक्तियों में ऐसे भी काफी संख्या में हैं, जिन्हें ट्रेस करने में दिक्कतें हो रही हैं। विशेष रूप से चार जिलों देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंहनगर और नैनीताल में यह समस्या अधिक है। मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने कहा कि अभी तक 211 व्यक्ति ऐसे हैं, जिन्होंने राज्य में दाखिल होने के बाद अपने मोबाइल फोन स्विच ऑफ कर दिए हैं। इन्हें ट्रेस करने के लिए वैकल्पिक कदम उठाए जा रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि राज्य में प्रवेश करने वालों पर नजर रखना जरूरी हो गया है। कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही कंटेनमेंट जोन में भी इजाफा हो रहा है। अन्य राज्यों से आने वालों के लिए पंजीकरण कराना बहुत जरूरी है। इस पर जोर देते हुए संबंधित जिलों के प्रशासन को इस बारे में हिदायत दी गई है। साथ ही कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए बेड, वेंटिलेटर और मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ को बढ़ाने की आवश्यकता में इजाफा हो गया है। इन परिस्थितियों में कोरोना संक्रमण रोकने के लिए व्यापक जन जागरूकता की आवश्यकता है। इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं। 

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केंद्र के निर्देश पर उठा कदम केंद्रीय गृह सचिव के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने अन्य राज्यों से आने वाले व्यक्तियों की प्रतिदिन की संख्या सीमित करने का आदेश रद कर दिया है। गौरतलब है कि केंद्र सरकार की अनलॉक-चार की गाइडलाइन के मुताबिक राज्य अब लॉकडाउन को लेकर खुद फैसला नहीं ले पाएंगे।

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