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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 08, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कांग्रेस के गले की फांस बना अनुच्छेद 370, पार्टी स्टैंड को लेकर पसोपेश

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Published: Thu, 08 Aug 2019 03:00 AM (IST)Updated: Fri, 09 Aug 2019 08:45 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त करने का फैसला उत्तराखंड में कांग्रेस के लिए गले की फांस बन गया है। कांग्रेस ...और पढ़ें

कांग्रेस के गले की फांस बना अनुच्छेद 370, पार्टी स्टैंड को लेकर पसोपेश
कांग्रेस के गले की फांस बना अनुच्छेद 370, पार्टी स्टैंड को लेकर पसोपेश

देहरादून, विकास धूलिया। जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त करने का फैसला उत्तराखंड में कांग्रेस के लिए गले की फांस बन गया है। संसद से विधेयक पारित होने और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद भी कांग्रेस तय नहीं कर पा रही है कि इस मसले पर क्या स्टैंड लिया जाए। पार्टी के लिए चिंता का सबब यह है कि नेतृत्व की ओर से इस संबंध में कुछ भी स्पष्ट न किए जाने के कारण वरिष्ठ नेता किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से कतरा रहे हैं तो कई कांग्रेस नेता केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले के पक्ष में खुलकर भी आ गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी के पुत्र और पिछला विधानसभा चुनाव कांग्रेस टिकट पर लड़े मनीष खंडूड़ी के अलावा प्रदेश के पूर्व मंत्री राजेंद्र भंडारी ने केंद्र के फैसले को सही ठहराया है। 

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के केंद्र के फैसले का हालांकि संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस ने विरोध किया, लेकिन संसद के बाहर कई बड़े नेता पार्टी लाइन से अलग अपनी बात रख चुके हैं। अब ऐसा ही कुछ उत्तराखंड में भी होता नजर आ रहा है। 

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने दो दिन पूर्व इस मसले पर राज्यसभा में गुलाम नबी आजाद के स्टैंड को पार्टी का स्टैंड मानने से इन्कार करते हुए कहा था कि विधेयक का मसौदा देखे-समझे बगैर इस मामले में वह टिप्पणी नहीं करना चाहेंगे। 'जागरण' से बातचीत में उन्होंने फिर यही बात दोहराई। प्रीतम ने कहा कि पार्टी का स्टैंड अभी नहीं आया है, लेकिन कांग्रेस की परंपरा रही है कि वह सदैव देशहित के मुद्दों के पक्ष में खड़ी होती है। राष्ट्रहित में जो भी निर्णय लिया जाएगा, कांग्रेस उसके साथ खड़ी रहेगी। 

कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने पर अब कई कांग्रेस नेता खुलकर इसकी पैरवी में उतर आए हैं। गोपेश्वर में मीडिया से बातचीत में पौड़ी लोकसभा सीट से पिछला चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में लड़ चुके मनीष खंडूड़ी ने केंद्र सरकार के जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन किया। साथ ही कहा कि सरकार की मंशा सही है, लेकिन इसे लागू करने का तरीका भी सही होना चाहिए। खंडूड़ी ने आगे कहा कि वह फौजी के बेटे हैं और इस अनुच्छेद के दुष्प्रभावों को भली भांति जानते हैं। 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी ने भी अनुच्छेद 370 हटाने का समर्थन करते हुए कहा कि यह जरूरी था। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि भाजपा इस अनुच्छेद को इसीलिए हटा पाई क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने इसकी गुंजाइश रखी थी। 

उधर, अपने राजनैतिक पैंतरों व बयानों के लिए पहचाने जाने वाले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अनुच्छेद 370 हटाए जाने के केंद्र के फैसले पर पूरी तरह खामोशी ओढ़े हुए हैं। रावत सोशल मीडिया पर भी खासे सक्रिय रहते हैं, लेकिन इस मसले पर उन्होंने किसी तरह की टिप्पणी अब तक सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर नहीं की है। 

दिलचस्प यह है कि सैनिक बहुल उत्तराखंड में कांग्रेस की परेशानी बढ़ने का यह दूसरा मौका है। इससे पहले लोकसभा चुनाव के मौके पर कांग्रेस के घोषणापत्र में अफस्पा कानून व सेडिशन एक्ट को हटाने के बिंदु शामिल होने से प्रदेश में पार्टी ने इस पर चुप्पी साधे रखना ही बेहतर समझा था। वहीं, भाजपा ने कांग्रेस को इस मसले पर पूरी तरह कठघरे में खड़ा कर दिया था।

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