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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 18, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उत्तराखंड: सरकार को घेरने की पुख्ता रणनीति को धार देने में जुटी कांग्रेस, हंगामेदार हो सकता है सत्र

By Raksha PanthariEdited By:
Published: Fri, 18 Sep 2020 03:54 PM (IST)

उत्तराखंड विधानसभा सत्र वर्चुअल तरीके से हो या पारंपरिक तरीके से प्रमुख प्रतिपक्षी दल कांग्रेस पुख्ता तरीके से सरकार की घेराबंदी करने में जुटी है।

उत्तराखंड: सरकार को घेरने की पुख्ता रणनीति को धार देने में जुटी कांग्रेस, हंगामेदार हो सकता है सत्र
उत्तराखंड: सरकार को घेरने की पुख्ता रणनीति को धार देने में जुटी कांग्रेस, हंगामेदार हो सकता है सत्र

देहरादून, राज्य ब्यूरो। 23 सितंबर से प्रस्तावित उत्तराखंड विधानसभा सत्र वर्चुअल तरीके से हो या पारंपरिक तरीके से, प्रमुख प्रतिपक्षी दल कांग्रेस पुख्ता तरीके से सरकार की घेराबंदी करने में जुटी है। नतीजतन सत्र के दौरान विपक्ष की ओर से हंगामा तकरीबन तय है।

2022 में विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रहे सत्तारूढ़ दल भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस में तल्खी बढ़ गई है। कोरोना काल में भी यह तल्खी कम नहीं हो सकी है। कांग्रेस ने विभिन्न मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रखा है। कोरोना के चलते लागू महामारी अधिनियम के तहत मुकदमें दर्ज होने के बावजूद कांग्रेस ने आक्रामक रुख जारी रखने के संकेत दे दिए हैं। इन्हीं तेवरों का प्रदर्शन अब विधानसभा सत्र के दौरान भी होना तय है। हालांकि सरकार अभी यह अंतिम फैसला नहीं ले पाई है कि सत्र पूरी तरह वर्चुअल तरीके से होगा या इसे आंशिक रूप से अमल में लाया जाएगा। इस पर भी तकरीबन सहमति बन चुकी है कि 65 वर्ष से अधिक उम्र के विधायकों को ऑनलाइन ही विधानसभा सत्र से जोड़ा जाए।

मुद्दों की फेहरिस्त तैयार

कांग्रेस ने वर्चुअल या ऑनलाइन तरीके से विधानसभा सत्र संचालित करने का भी तीखा विरोध शुरू कर दिया है। प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ इंदिरा हृदयेश, विधायक और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव काजी निजामुद्दीन का कहना है कि वर्चुअल आयोजन के नाम पर विधानसभा सत्र की खानापूर्ति नहीं की जानी चाहिए। दरअसल, विपक्षी पार्टी अब किसी भी मुद्दे पर सरकार को ढील देने के पक्ष में नहीं है। कोरोना संकट काल में सरकार को कई मोर्चों पर जूझना पड़ रहा है। 

कोरोना संक्रमण से नागरिकों की सुरक्षा, अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ ही कोविड सेंटरों के हालात के साथ ही बढ़ती बेरोजगार, ऐसे मुद्दे हैं जिन्हें तरकश में भरकर कांग्रेस सरकार पर हमला करने की रणनीति तैयार कर चुकी है। एक भाजपा विधायक पर यौन उत्पीडऩ का आरोप कांग्रेस के आक्रामण को नई धार देने जा रहा है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर के मुद्दों की फेहरिस्त भी पार्टी ने तैयार की है। इनके बूते विधानसभा क्षेत्रवार सत्तापक्ष पर हमले की योजना तैयार की गई है। यही वजह है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह का कहना है कि पार्टी ऊधमसिंहनगर जिले के बाजपुर क्षेत्र के निवासियों को भूमिधरी अधिकार दिलाने के मुद्दे को भी विधानसभा में उठाएगी।

कांग्रेस तेज कर रही आक्रमण की धार

कांग्रेस के आक्रमण में आने वाले दिनों में और तेजी आना भी तय है। इसे ध्यान में रखकर ही पार्टी हाईकमान ने उत्तराखंड कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के रूप में देवेंद्र यादव की नियुक्ति की है। राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनाने और फिर उसे बचाने में देवेंद्र यादव अहम भूमिका निभा चुके हैं। उत्तराखंड में भी देवेंद्र यादव के सामने कांग्रेस के दिग्गजों और गुटों के बीच संतुलन कायम करने की चुनौती है। देवेंद्र यादव इस चुनौती को महसूस भी कर रहे हैं। हालांकि, उनके लिए इस चुनौती से पार पाना आसान नहीं होगा।

प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव के सामने चुनौती

प्रदेश में कांग्रेस के दिग्गज पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को पार्टी राष्ट्रीय महासचिव के साथ ही पंजाब जैसे बड़े प्रदेश का प्रभारी बना चुकी है। रावत पर हाईकमान के बढ़ते भरोसे और राष्ट्रीय राजनीति में उनकी हैसियत को देखते हुए देवेंद्र यादव को भी संतुलन साधने के लिए खासा दम लगाना होगा। इन सबके बीच पिछले कुछ दिनों से कांग्रेस के सभी धड़ों में यह सहमति देखने को मिल रही है कि भाजपा के वर्चस्व को तोड़ने के लिए एकजुट होकर मजबूती से संघर्ष किया जाए। इस वजह से हरीश रावत से लेकर प्रदेश में पार्टी के अन्य नेता सावधानी से ही बयानबाजी कर रहे हैं। सभी नेताओं के निशाने पर केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकारें हैं।

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माहौल बनाने में जुटे कांग्रेसी दिग्गज

कांग्रेस के दिग्गजों ने विधानसभा सत्र से पहले ही राज्य के भीतर सियासी माहौल गरमाना शुरू कर दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत किसानों और खेती के लिए लाए गए मोदी सरकार के विधेयकों के खिलाफ मौन व्रत कर चुके हैं। वहीं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय कोरोना संकटकाल में राज्य के नागरिकों के बिजली और पानी के बिलों को माफ करने को लेकर आंदोलनरत हैं। कांग्रेस की बढ़ती सक्रियता राज्य सरकार की मुश्किलों में इजाफा करने जा रही है।

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