देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश में कांग्रेस के भीतर गाहे-बगाहे अलग-अलग राग अलापने के आदि हो चुके नेताओं को हाईकमान के सख्त रुख से दो-चार होना पड़ सकता है। पार्टी नेतृत्व ने जनता के बीच पैठ मजबूत करने, गुटबाजी से परहेज और संगठन को मजबूत बनाने को कहा है। 

सबको साथ लेकर चलने की रणनीति के चलते प्रदेश कांग्रेस की नई कार्यकारिणी को छोटा रखने के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह के सुझाव को खारिज किया गया। वहीं दिग्गज नेताओं को भी एकला चलो की मुहिम छोड़ने की हिदायत दी गई है। 

उत्तराखंड में वर्ष 2022 में होने वाले अगले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस अभी से अलर्ट मोड में है। प्रदेश कांग्रेस की मौजूदा कार्यकारिणी भंग कर नई कार्यकारिणी के गठन का रास्ता साफ कर हाईकमान ने एक तीर से कई निशाने कई साध डाले हैं। टीम प्रीतम के गठन में लग रहे अड़ंगे को सियासी फिजाओं में उछालकर सूबे में भी बदलाव की चर्चाओं को हवा देने वालों को संकेत दिया ही गया है, साथ में पार्टी कार्यक्रमों को छोड़कर समानांतर अलहदा कार्यक्रमों को लेकर भी पार्टी का रुख सख्त होने जा रहा है। 

नई कार्यकारिणी को घोषित करने से पहले बीते ढाई साल से चल रही पुरानी प्रदेश कांग्रेस कमेटी को जिसतरह भंग किया गया, उससे प्रदेश के क्षत्रप भी सकते में हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत हरिद्वार में प्रस्तावित अपने कार्यक्रमों को फिलहाल तीन माह तक छोड़ने की घोषणा कर चुके हैं। इसे सियासी हलकों में भले ही उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन पार्टी सूत्र इसे हाईकमान के सख्त रुख का असर बता रहे हैं। 

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पूर्व प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय भी पार्टी कार्यक्रमों पर अपने कार्यक्रम को तरजीह दे रहे हैं। सूत्रों की मानें तो इस बारे में कांग्रेस पर्यवेक्षकों के साथ ही प्रदेश प्रभारी ने भी हाईकमान को रिपोर्ट सौंपी है। भविष्य में पार्टी कार्यक्रमों को दरकिनार करना अब क्षत्रपों के लिए भी मुमकिन नहीं होगा। पार्टी नेतृत्व ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह को भी सबको साथ लेकर चलने को कहा है।

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