यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 27, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
खेल मंत्री के बयान पर कांग्रेस का तंज, सबूत हैं तो देर किस बात की
खेल मंत्री के उस बयान पर कांग्रेस ने तंज कसा है, जिसमें उन्होंने महिला खिलाड़ियों के उत्पीड़न की बात कही। ...और पढ़ें

देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: खेल मंत्री अरविंद पांडे द्वारा महिला खिलाड़ियों के उत्पीड़न के मामले में दिया गया बयान अब तूल पकड़ने लगा है। सोशल मीडिया में वायरल इस प्रकरण के बाद कांग्रेस ने भी इस मामले में सरकार को निशाने पर लिया है। पूर्व खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने कहा कि यदि खेल मंत्री अरविंद पांडे को सारी जानकारी है, तो फिर दोषियों के खिलाफ मुकदमा करने में देरी क्यों की जा रही है। उनके इस बयान से अभिभावकों में संघों के प्रति अविश्वास का भाव पैदा हुआ है। सरकार को इस मामले में त्वरित कार्रवार्इ करनी चाहिए।
खेल मंत्री अरविंद पांडे ने हाल ही में एक चैनल को दिए बयान में कहा था कि खेल संघों से जुड़े कई लोगों ने खिलाड़ियों का उत्पीड़न किया। कई का जीवन तक खराब किया है। मेरे पास इसके पुख्ता सुबूत हैं कि खिलाड़ियों का शोषण हुआ है। कुछ मामलों में तो ऐसे लोगों के खिलाफ आइपीसी की धारा 376 में मुकदमा कराया जाएगा। खेल मंत्री के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पीड़ित सामने आएंगे तो कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने इस मामले में खेल मंत्री से भी बात करने की बात कही।
मुख्यमंत्री व खेल मंत्री के बयान सामने आने के बाद राजनीतिक सरगर्मी भी तेज हो गई हैं। वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने खेल मंत्री अरविंद पांडे के बयान को बेहद चिंताजनक करार दिया। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश की अस्मिता से जुड़ा प्रश्न है। जब खेल मंत्री के पास सारे सुबूत हैं तो वे इस मामले में देरी क्यों कर रहे हैं। अब उन्हें किस बात का इंतजार है। एक मंत्री यदि ऐसा बयान देता है तो यह बात अपने आप में ही बेहद गंभीर हो जाती है।
उन्होंने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का बयान भी बेहद गैर जिम्मेदाराना है कि पीड़ित सामने आकर शिकायत करें। जब सरकार के मंत्री के पास सारे सुबूत हैं तो इस मामले में अविलंब कार्रवाई होनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद पूरे प्रदेश में खेल संघों को लेकर एक अविश्वास का माहौल बन गया है। सरकार को इस मामले में तुरंत कदम उठाना चाहिए।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
यह पहली बार नहीं है कि जब महिला खिलाड़ियों के शोषण को लेकर बात उठी है। इससे पूर्व कुछ वर्ष पहले कुछ महिला बास्केटबाल खिलाड़ी भी इस तरह का मामला उठा चुकी हैं। यह मामला महिला आयोग तक में गया।
हालांकि, यह बात अलग है कि इस मामले में कोई कार्रवार्इ नहीं हुई है।
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