देहरादून, राज्य ब्यूरो। उत्तराखंड विधानसभा का शीतकालीन सत्र आगामी चार दिसंबर से आरंभ हो रहा है। पिछले छह वर्षो में यह पहला अवसर है जब किसी साल गैरसैंण (चमोली) में एक भी सत्र आयोजित नहीं किया गया। अब इस मसले पर सरकार और विपक्ष कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं। 

कांग्रेस महासचिव व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने ऐलान किया है कि वह सत्र के पहले दिन चार दिसंबर को गैरसैंण और दूसरे दिन पांच दिसंबर को देहरादून में विधानसभा के समक्ष धरने पर बैठेंगे। उधर, भाजपा ने रावत के इस कदम को शिगूफा करार दिया है। 

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिये सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इसमें कहा है-राज्य में किसान त्रस्त, नौजवान लस्त-पस्त, उत्तराखंड अस्त-व्यस्त और सरकार मस्त है। यह स्थिति बदलनी है। गन्ने का भुगतान नहीं, खरीद मूल्य दूर, बेबस किसान औने-पौने दाम पर गन्ना बेच रहा है। 

मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने आगे लिखा है-त्रिवेंद्र सिंह के वजन घटाने की सलाह पर अमल करने के लिए मैं पांच दिसंबर को सुबह 11 बजे विधानसभा भवन के सम्मुख उपवास व धरने पर बैठूंगा। गैरसैंण और गन्ना, दोनों मेरी आत्मा का हिस्सा हैं। 

गौरतलब है कि रावत इससे पूर्व गैरसैंण में सत्र का आयोजन न कराए जाने के विरोध में चार दिसंबर को गैरसैंण में धरने की घोषणा कर चुके हैं। उधर, भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा गैरसैंण में शीत कालीन सत्र को लेकर उपवास और धरना देने की घोषणा को राजनीतिक शिगूफा बताया और कहा कि शीतकालीन सत्र देहरादून में करने का निर्णय सामूहिक है। इसमें काग्रेस व नेता प्रतिपक्ष की भी सहमति है। 

भाजपा प्रदेश मीडिया प्रभारी डॉ. देवेंद्र भसीन ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शीतकालीन सत्र को लेकर जो बयान दे रहे हैं व धरने की घोषणा कर रहे हैं, काग्रेस व नेता प्रतिपक्ष के भी खिलाफ हैं क्योंकि काग्रेस भी इस निर्णय में शामिल है। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश की भी इसमें सहमति है। 

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उन्होंने कहा कि सर्दियों के लिहाज से गैरसैंण में अवस्थापना सुविधाओं की कमी है। सवाल मंत्रियों व विधायकों के रहने का ही नहीं है, बल्कि विधानसभा सत्र के लिए बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी और सुरक्षा कर्मियों को भी जाना होता है। भाजपा ने टीएचडीसी को लेकर काग्रेस के आदोलन को भी औचित्यहीन बताया।

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