जागरण संवाददाता, देहरादून: आपसी भाईचारा और सांप्रदायिक सौहार्द तभी संभव है, जब बच्चों में सर्वधर्म संभाव की शिक्षा दी जाए। बचपन से ही हिंदू-मुस्लिम सिख-इसाई को एक-दूसरे से स्नेह की सीख दी जानी चाहिए। हालांकि, वर्तमान पीढ़ी आपसी मतभेदों को भूल चुकी है और देश की दिशा और दशा सुधारने में यह सकारात्मक संकेत हैं। यह बातें मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक इंदिरेश कुमार ने एक संवाद कार्यक्रम में कहीं।

राष्ट्रीय सर्व धर्म एकता संघ की ओर से शनिवार शाम को आइआरडीटी भवन सर्वे चौक में द मीटिंग आफ माइंडस: डाइलाग द वे फारवर्ड थीम पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसके मुख्य अतिथि मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मुख्य संरक्षक इंदिरेश कुमार रहे। उन्होंने कहा कि बच्चों की शिक्षा पर विशेष जोर देना होगा और आपसी मतभेदों को दूर करने के लिए संवाद करना होगा। तभी देश का विकास एवं भाईचारा कायम हो सकता है। इस दौरान संघ के अध्यक्ष और कार्यक्रम संयोजक मुफ्ती समून कासमी ने कहा कि समाज को सही दिशा में आगे बढ़ाना सभी समुदाय के वरिष्ठजनों की जिम्मेदारी है। युवाओं को आपसी सौहार्दपूर्ण वातावरण मुहैया कराने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। इस दौरान डा. ख्वाजा इफ्तिकार, रिटायर्ड ले. जर्नल जमीरूद्दीन शाह, डा. आलमगीर, बिलाल उर रहमान, साजिद मलिक, सलीम सैफी, मोहम्मद आसिफ आदि मौजूद रहे।

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शिक्षा के उन्नयन में डीबीएस की अहम भूमिका

आजादी का अमृत महोत्सव के तहत शनिवार को डीबीएस कालेज में आयोजित वेबिनार में प्रतिभागियों ने कहा कि उच्च शिक्षा के उन्नयन में डीबीएस की अहम भूमिका रही है। इस मौके पर बोर्ड आफ मैनेजमेंट के वरिष्ठ सदस्य बीबी रायजादा ने उत्तराखंड की उच्च शिक्षा में डीबीएस महाविद्यालय का योगदान विषय पर अपने विचार रखे। डा. आरके मेहता ने दयानंद सरस्वती शिक्षा समिति के वरिष्ठ सदस्य ब्रिजेंद्र स्वरूप की जीवन यात्रा को अमृत महोत्सव के माध्यम से जीवित करने के लिए कालेज के प्राचार्य, संयोजक व तकनीकी सलाहकार को संज्ञान में लाने को कहा।

राज्य लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष डीपी जोशी ने वीडियो संदेश में कहा कि डीबीएस कालेज के कई छात्रा राज्य लोक सेवा आयोग व संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर आज देश की सेवा कर रहे हैं। जिला प्रोबस्नरी अधिकारी मोहित चौधरी ने अपने विद्यार्थी जीवन से आज तक की यात्रा में अपने शिक्षकों को याद किया। कहा कि तब और आज में बहुत परिवर्तन हो गया है, लेकिन डीबीएस के कायदे-कानून आज भी सख्त हैं। पूर्व विद्यार्थी मनजीत सिंह बिष्ट ने कहा कि मैं आज एक माडल स्कूल का शिक्षक हूं जो कि डीबीएस कालेज की शिक्षा के कारण संभव हो पाया। संयोजक डा. अलका सूरी ने कार्यक्रम का संचालन किया। तकनीकी सहयोग डा. अजय कुमार ने दिया। इस मौके पर डा. अजय श्रीवास्तव, रुपेश त्यागी, निर्मला, चेतना बिष्ट आदि मौजूद रहे।

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Edited By: Sumit Kumar