देहरादून, राज्य ब्यूरो। उत्तराखंड में सियासी अस्थिरता को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हरीश रावत की सियासी गुगली के चाहे जो निहितार्थ निकाले जाएं, लेकिन इसने सियासी हल्कों में हलचल तो मचा ही दी। सोशल मीडिया में शनिवार को दिनभर यह चर्चा के केंद्र में रहा। कांग्रेस जहां इसे लेकर चटखारे लेती रही, वहीं भाजपा ने जोरदार पलटवार किया। भाजपा सरकार और संगठन ने सियासी अस्थिरता व नेतृत्व परिवर्तन जैसी चर्चा को पूरी तरह खारिज किया। साथ ही कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी और अपने दल की चिंता करें, भाजपा में उसकी चिंता करने वाले बहुत लोग हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को दो ट्वीट किए, जिसने सियासी हलकों में कई चर्चाओं को जन्म दे दिया। रावत ने ट्वीट किया कि दिल्ली के चुनाव और उत्तराखंड में मची हलचल, इस बात का संकेत दे रही कि उत्तराखंड फिर राजनीतिक अस्थिरता की ओर जा रहा है। उन्होंने 2007 में बनी सरकार में नेतृत्व परिवर्तन को भी न सिर्फ अस्थिरता से जोड़ा, बल्कि मौजूदा प्रदेश सरकार को भी निशाने पर लिया।

इसके बाद सोशल मीडिया में शुरू हुआ चर्चा का क्रम शनिवार को भी दिनभर बना रहा। शुक्रवार को सोशल मीडिया में वायरल एक पोस्ट में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के उत्तराधिकारी के तौर पर पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बताया गया था। माना गया कि इसी के मद्देनजर हरीश रावत ने यह सियासी गुगली फेंकी। शनिवार को भी सोशल मीडिया में इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गरम रहा।

सोशल मीडिया में चल रही चर्चा में सियासी अस्थिरता को लेकर मुख्यमंत्री के 17 फरवरी को दिल्ली के कार्यक्रम के अलावा केंद्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक के देहरादून दौरे को इससे जोड़ दिया गया। साथ ही तरह-तरह के कयास लगाए जाने लगे, जबकि मुख्यमंत्री का दिल्ली का कार्यक्रम पहले से तय है और निशंक आधिकारिक दौरे पर आए हैं।

इस परिदृश्य के बीच भाजपा सरकार और संगठन ने सियासी अस्थिरता व नेतृत्व परिवर्तन जैसी चर्चा को सिरे से खारिज कर कांग्रेस पर जोरदार पलटवार किया। सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को निशाने पर लिया। कहा कि हरीश रावत को अपनी और अपने घर की चिंता करनी चाहिए।

मदन कौशिक (सरकार के प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री) का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अपनी और अपनी पार्टी की चिंता करें। कांग्र्रेस में प्रदेश कार्यकारिणी से लेकर तमाम मामलों में किस तरह सिरफुटव्वल हुई और धड़ेबाजी सामने आई, वह किसी से छिपी नहीं है। लिहाजा, हरीश रावत को भाजपा की चिंता करने की जरूरत नहीं है। भाजपा में उसकी चिंता करने वाले बहुत लोग हैं। हरदा अपना घर संभालें।

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बंशीधर भगत (प्रदेश अध्यक्ष भाजपा) का कहना है कि कहावत है कि सावन के अंधे को हरा ही हरा नजर आता है। कुछ ऐसी ही स्थिति कांग्रेस महासचिव हरीश रावत की भी है। वह भाजपा के बहाने अपने अंदर की बात कह रहे हैं। हरीश रावत की पीड़ा उनके अपने दल की पीड़ा है, जहां अस्थिरता का वातावरण है।

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