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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 04, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उत्तराखंड में रोजगार के द्वार खोलेगा बर्ड टूरिज्म, वर्तमान में करीब 60 स्थलों में ही होती है बर्ड वाचिंग

By Sunil NegiEdited By:
Published: Sun, 04 Apr 2021 06:05 AM (IST)

उत्तराखंड में बर्ड टूरिज्म की अपार संभावनाओं को देखते हुए सरकार ने अब इसे बढ़ावा देने का निश्चय किया है। ...और पढ़ें

बेजोड़ पक्षी विविधता वाले उत्तराखंड में अब बर्ड टूरिज्म रोजगार के नए द्वार खोलेगा।
बेजोड़ पक्षी विविधता वाले उत्तराखंड में अब बर्ड टूरिज्म रोजगार के नए द्वार खोलेगा।

राज्य ब्यूरो, देहरादून। बेजोड़ पक्षी विविधता वाले उत्तराखंड में अब बर्ड टूरिज्म रोजगार के नए द्वार खोलेगा। राज्य में बर्ड टूरिज्म की अपार संभावनाओं को देखते हुए सरकार ने अब इसे बढ़ावा देने का निश्चय किया है। इस सिलसिले में वन विभाग के साथ ही उत्तराखंड ईको टूरिज्म बोर्ड को नए सिरे से रणनीति तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। कोशिशें परवान चढ़ी तो आने वाले दिनों में 71.05 फीसद वन भूभाग वाले इस राज्य में वन्यजीव पर्यटन की भांति पक्षी पर्यटन से भी न सिर्फ झोलियां भरेंगी, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर सृजित होंगे।

विषम भूगोल और 71.05 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड की जलवायु भी विविधता से भरी है। पहाड़, नदी, घाटी, मैदान सभी कुछ यहां पर है। यही कारण भी है कि परिंदों को यहां की जलवायु खूब रास आती है। आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। देशभर में पाई जाने वाली पक्षियों की 1300 में से करीब सात सौ प्रजातियां यहां चिह्नित की गई हैं। यही नहीं, विदेशों से मेहमान परिंदे भी यहां खूब आते हैं। यहां की पक्षी विविधता का दीदार करने के लिए हर साल ही काफी संख्या में पक्षी प्रेमी पहुंचते हैं, मगर यह मुहिम चुनिंदा स्थलों तक ही सिमटी हुई है।

कार्बेट व राजाजी टाइगर रिजर्व, आसन, झिलमिल, नैनादेवी व पवलगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व, गंगोत्री नेशनल पार्क, लैंसडौन, देहरादून, चकराता, मसूरी, कालागढ़ समेत अन्य वन प्रभागों के करीब 60 स्थलों में ही बर्ड वाचिंग हो रही है, जबकि समूचा उत्तराखंड इस लिहाज से धनी है। फिर बर्ड वाचिंग के लिए किसी बड़े तामझाम की जरूरत नहीं है। प्रकृति को बगैर कोई नुकसान पहुंचाए, बर्ड वाचिंग हो सकती है। बर्ड वाचिंग के लिए सैलानियों की आमद बढऩे से जहां प्रदेश को राजस्व मिलेगा, वहीं स्थानीय स्तर पर गाइड, होम स्टे आदि के रूप में रोजगार के अवसर सृजित होंगे। साथ ही लोग पक्षी संरक्षण को भी प्रेरित होंगे।

इस सबको देखते हुए प्रदेश सरकार ने बर्ड टूरिज्म पर खास फोकस करने की ठानी है। हालांकि, वन महकमा इस क्रम में हर साल ही बर्ड फेस्टिवल जैसे आयोजन करता है, मगर अब इसे अधिक विस्तार देने की तैयारी है। राज्य के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक राजीव भरतरी के अनुसार बर्ड टूरिज्म के मद्देनजर नए स्थल चिह्नित किए जा रहे हैं। वन पंचायतों के सहयोग से भी इस मुहिम को आगे बढ़ाया जाएगा। कार्बेट टाइगर रिजर्व से सटी कुछ वन पंचायतों में इसकी कसरत चल रही है। ऐसे ही कदम अन्य क्षेत्रों में भी उठाए जा रहे हैं। दूसरी, तरफ ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड भी बर्ड टूरिज्म की कार्ययोजना तैयार करने में जुटा है।

डा.हरक सिंह रावत (वन एवं पर्यावरण मंत्री, उत्तराखंड) ने कहा कि दुनियाभर में बर्ड टूरिज्म एक बड़े उद्योग के तौर पर उभर रहा है। उत्तराखंड में भी इसकी अपार संभावनाएं हैं। इससे राज्य को राजस्व भी मिलेगा और स्थानीय निवासियों को रोजगार भी मिलेगा। इसे देखते हुए वन विभाग और उत्तराखंड ईको टूरिज्म डेवलपमेंट बोर्ड को नए सिरे से कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

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