विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

उत्तराखंड के तराई में बंदूकों को खामोश करने लिए खंडूड़ी ने अरविंद पांडे को दी थी जिम्मेदारी, विधानसभा सत्र में ताजा हुई यादें

By Ashwani Kumar TripathiEdited By: Rahul Chauhan
Published: Tue, 27 Oct 2026 01:58 PM (IST)

पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूूड़ी ने तराई में बंदूक संस्कृति खत्म करने के लिए युवाओं को रोजगार देने और औद्योगिक विकास ...और पढ़ें

News Article Hero Image
timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। तराई में बंदूकों का साम्राज्य खत्म करना था, लेकिन रास्ता केवल पुलिसिया कार्रवाई का नहीं, बल्कि युवाओं के हाथों में रोजगार देने का चुना गया। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी से जुड़ा यह संस्मरण विधायक अरविंद पांडेय ने विधानसभा में साझा किया।

उन्होंने बताया कि विधायक बनने के बाद जब वह देहरादून में खंडूड़ी से मिलने और आभार जताने पहुंचे तो उन्होंने तराई से गन कल्चर खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपी। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं थी, बल्कि युवाओं को ऐसे अवसर देने की जरूरत भी थी, जिससे उनके सामने रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का रास्ता खुले।

तराई में गन कल्चर उस दौर की ऐसी चुनौती थी, जिससे निपटने की जरूरत लगातार महसूस की जा रही थी। अरविंद पांडेय के मुताबिक, खंडूड़ी चाहते थे कि युवाओं को रोजगार मिले और क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ें।

उनका जोर इस बात पर था कि युवाओं को काम के अवसर मिलें, लोग आर्थिक रूप से मजबूत हों और विकास की मुख्यधारा से जुड़ें। पांडेय ने कहा कि खंडूड़ी ने तराई में बंदूकों के साम्राज्य को खत्म करने का लक्ष्य उनके सामने रखा था।

बंदूकों के मुकाबले रोजगार का रास्ता

अरविंद पांडेय ने वर्ष 2007 से 2012 के बीच के दौर को याद करते हुए कहा कि खंडूड़ी ने युवाओं को रोजगार देने के लिए पट्टे दिलाने और औद्योगिक इकाइयां स्थापित कराने की दिशा में काम किया।

काशीपुर, बाजपुर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। पांडेय ने विशेष रूप से बाजपुर का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां औद्योगिक विकास की जरूरत थी और खंडूड़ी ने इस दिशा में पहल की।

उद्योग लगाने में रिश्वत न देनी पड़े, यही थी पहचान

बीसी खंडूड़ी की कार्यशैली का उल्लेख करते हुए अरविंद पांडेय ने उनकी ईमानदारी और पारदर्शिता को विशेष रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि खंडूड़ी के कार्यकाल में किसी युवा उद्योगपति को उद्योग लगाने के लिए रिश्वत नहीं देनी पड़ी।

पांडेय के मुताबिक, खंडूड़ी ऐसी व्यवस्था चाहते थे, जिसमें उद्यमियों को सरकारी तंत्र पर भरोसा हो और वे बिना अनुचित दबाव के अपना काम कर सकें। पांडेय ने कहा कि यदि ईमानदारी और भरोसे का कोई दूसरा नाम है तो वह बीसी खंडूड़ी हैं।

उनके अनुसार, औद्योगिक विकास के साथ पारदर्शी प्रशासन पर जोर देना खंडूड़ी की कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा था। उद्योग लगाने के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना और युवाओं को रोजगार से जोड़ना उनके संस्मरण में एक-दूसरे से जुड़े प्रयासों के रूप में सामने आया।

सुशासन के साथ सामाजिक बदलाव की कोशिश

विधानसभा में श्रद्धांजलि देते हुए अरविंद पांडेय ने खंडूड़ी के राजनीतिक जीवन के उस पहलू को सामने रखा, जिसमें प्रशासनिक ईमानदारी, औद्योगिक विकास और युवाओं के भविष्य की चिंता प्रमुख थी।

तराई से गन कल्चर खत्म करने की जिम्मेदारी सौंपे जाने के अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि खंडूड़ी ने ऐसा इतिहास बनाने का काम किया, जिसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

यह भी पढ़ें- चमोली के सेमी गांव में मजदूरों के बीच खूनी संघर्ष, बिजनौर निवासी मजदूर की मौत

यह भी पढ़ें- चमोली के जोशीमठ में भालू का आतंक, एक ही परिवार के चार लोगों को हमला कर किया घायल