उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से पहले, मां सुषमा स्वराज की राजनीतिक कर्मभूमि उत्तराखंड में बेटी बांसुरी की नई पारी
उत्तराखंड भाजपा में बांसुरी स्वराज को सह प्रभारी की नई जिम्मेदारी मिली है, जो उनकी मां सुषमा स्वराज की राजनीतिक ...और पढ़ें


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राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। उत्तराखंड भाजपा में सांसद बांसुरी स्वराज को मिली नई भूमिका संगठनात्मक जिम्मेदारी के साथ भावनात्मक अहसास भी है। यह वही उत्तराखंड है, जहां उनकी मां और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने राज्यसभा सदस्य के रूप में प्रदेश का प्रतिनिधित्व किया था।
अब करीब ढाई दशक बाद उनकी बेटी को उसी प्रदेश में भाजपा संगठन की जिम्मेदारी मिली है। भाजपा ने नई दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद व अधिवक्ता बांसुरी स्वराज को उत्तराखंड का सह प्रभारी बनाया है।
हालांकि, ऐसा नहीं है कि उन्हें संगठन में पहली बार जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वह दिल्ली भाजपा में प्रदेश मंत्री की जिम्मेदारी भी निभा चुकी हैं।
संगठन की इस नई भूमिका में उन्हें प्रदेश के राजनीतिक भूगोल, पहाड़ और मैदान के अलग-अलग समीकरणों तथा कार्यकर्ताओं के साथ संवाद को समझने का अवसर मिलेगा। लेकिन इस राजनीतिक जिम्मेदारी के पीछे उनके लिए मां की स्मृतियों का एक अहसास भी होगा।
सुषमा स्वराज अप्रैल 2000 में राज्यसभा के लिए चुनी गई थीं। नौ नवंबर 2000 को उत्तराखंड के अलग राज्य बनने के बाद उनका राज्यसभा कार्यकाल इसी प्रदेश से जुड़ा रहा और अप्रैल 2006 तक उन्होंने उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया।
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नए राज्य के शुरुआती वर्षों की राजनीति में उनका यह जुड़ाव महत्वपूर्ण रहा। अब बांसुरी जब उत्तराखंड आएंगी तो संगठन की बैठकों और राजनीतिक संवाद के साथ उस दौर की यादें भी उनके लिए इस प्रदेश को अलग अर्थ देंगी। मां का संसदीय रिश्ता जिस धरती से रहा, वहीं बेटी को पार्टी संगठन में भूमिका मिली है।
