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आयुष-यूजी दाखिलों में अब प्रमाण पत्रों की होगी दोहरी जांच, फर्जीवाड़े पर लगेगी लगाम

Published: Thu, 24 Sep 2026 08:01 PM (IST)

एमबीबीएस फर्जीवाड़े के बाद उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने आयुष-यूजी दाखिलों में सख्ती बढ़ा दी है। अब आरक्षित वर्ग के प्रमाण ...और पढ़ें

यह फोटो एआई से बनाई गई है

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जागरण संवाददाता, देहरादून। एमबीबीएस दाखिले में फर्जी प्रमाणपत्रों के मामले सामने आने के बाद अब आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने में भी आयुष-यूजी में दस्तावेजों की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। आरक्षित वर्ग की सीट पाने वाले अभ्यर्थियों को अब सिर्फ काउंसलिंग में सीट आवंटित होने से प्रवेश नहीं मिल जाएगा।

कालेज पहले प्रमाणपत्रों की जांच करेंगे और इसके बाद उनकी पुष्टि जिलाधिकारी कार्यालय से कराई जाएगी। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय ने सभी परिसरों और संबद्ध आयुर्वेद कालेजों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इसमें साफ किया गया है कि काउंसलिंग बोर्ड की ओर से श्रेणी या उप-श्रेणी में सीट आवंटन औपबंधिक रहेगा।

अंतिम प्रवेश तभी मान्य होगा, जब संबंधित अभ्यर्थी के प्रमाणपत्रों की जांच पूरी हो जाए और उसकी पात्रता सही पाई जाए। कालेजों को मूल प्रमाणपत्रों की जांच कर यह देखना होगा कि प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी ने जारी किए हैं या नहीं और वे निर्धारित नियमों के मुताबिक वैध हैं या नहीं। खासतौर पर आरक्षित श्रेणी और उप-श्रेणी में सीट पाने वाले अभ्यर्थियों की पात्रता की जांच की जाएगी।

कालेज के बाद डीएम कार्यालय से पुष्टि

विवि प्रशासन के अनुसार काउंसलिंग के प्रत्येक चरण के बाद कालेज अपने स्तर पर अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का परीक्षण करेंगे। इसके बाद संबंधित प्रमाणपत्रों को निर्धारित प्रारूप में विश्वविद्यालय भेजा जाएगा, जहां से जिलाधिकारी कार्यालयों से उनकी पुष्टि कराई जाएगी।

यानी प्रमाणपत्र सही होने की अंतिम पुष्टि की प्रक्रिया कॉलेज स्तर की जांच के बाद आगे बढ़ेगी। किसी प्रमाणपत्र की वैधता, श्रेणी या अभ्यर्थी की पात्रता को लेकर संदेह होने पर कालेज खुद से प्रवेश नहीं दे सकेंगे। ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय से मार्गदर्शन लेना होगा।

गलत प्रवेश पर कालेज-प्राचार्य जिम्मेदार

विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि बिना उचित सत्यापन या नियमों के विपरीत प्रवेश दिए जाने पर संबंधित कालेज और प्राचार्य जिम्मेदार होंगे। ऐसे मामलों में प्रशासनिक और विधिक कार्रवाई की जा सकती है। यह सख्ती ऐसे समय की गई है जब राज्य में एमबीबीएस दाखिले की काउंसलिंग में संदिग्ध प्रमाणपत्रों के मामले सामने आए हैं।

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स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने पर न सिर्फ चार अभ्यर्थियों का सीट आवंटन रद कर दिया गया, बल्कि मुकदमा भी दर्ज हुआ। एमबीबीएस-बीडीएस में प्रवेशित और फ्लोट का विकल्प चुनने वाले 788 अभ्यर्थयिों के प्रमाण पत्र जांच के लिए जिलों को भेजे गए हैं।

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