देहरादून में कैंपस से पार्टियों तक फैला नशे का जाल, युवा बन रहे सप्लाई चेन का हिस्सा
देहरादून में नशे का चेहरा बदल रहा है, जहां तस्कर अब कैंपस, हॉस्टल और पार्टियों में युवाओं को निशाना बना ...और पढ़ें

इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

समय कम है?
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अंकुर अग्रवाल, देहरादून। दून में नशे का चेहरा बदल रहा है। अब तस्कर सिर्फ गली-मोहल्लों में ग्राहक तलाशते नजर नहीं आ रहे, बल्कि कैंपस, हास्टल, पीजी, निजी पार्टियों और देर रात के पार्टी ठिकानों तक पहुंच चुके नेटवर्क में युवाओं को ही अपनी अगली कड़ी बनाया जा रहा है। एमडीएमए के साथ छह छात्रों की गिरफ्तारी ने इसी बदलते खतरे की गंभीर तस्वीर सामने रखी है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार छात्र तकनीकी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर रहे थे और दिल्ली के सिद्धार्थ उर्फ सिद्धू गिरोह से जुड़े पैडलर के तौर पर काम कर रहे थे। चार लाख रुपये से अधिक कीमत की एमडीएमए बरामदगी ने यह भी संकेत दिया है कि दून का नशा बाजार अब केवल स्मैक, चरस और गांजे तक सीमित नहीं है।
महंगी पार्टी ड्रग्स ने भी यहां अपनी जगह बना ली है। और चिंता सिर्फ इतनी नहीं कि छात्र नशे के ग्राहक बन रहे हैं। सबसे खतरनाक बदलाव यह है कि ग्राहक को ही पैडलर बनाने की कोशिश हो रही है।
कैंपस में ग्राहक, हास्टल में नेटवर्क और पार्टी में खपत
प्रेमनगर इसका बड़ा उदाहरण है। अगस्त में करीब 20 लाख रुपये की स्मैक के साथ पकड़े गए दो आरोपितों से पूछताछ में पुलिस ने बताया था कि वे मुजफ्फरनगर (उत्तर प्रदेश) से स्मैक लाकर शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों और पीजी-हास्टल में रहने वाले युवाओं को सप्लाई करते थे।
पटेलनगर-आइएसबीटी क्षेत्र में भी बाहर से लाई गई स्मैक की सप्लाई के मामले सामने आए। वहीं रायपुर में 48.55 ग्राम एमडीएमए और 40.75 ग्राम स्मैक की बरामदगी ने नशे के बाजार के दूसरे चेहरे को सामने रखा।
पुलिस के अनुसार एमडीएमए को सहारनपुर से लाकर दून की हाईप्रोफाइल पार्टियों में खपाने की तैयारी थी। यानी एक तरफ छात्रावासों में सस्ता नशा पहुंच रहा है, दूसरी तरफ पार्टियों में महंगी ड्रग्स की मांग तैयार हो रही है। बाजार अलग हो सकते हैं, लेकिन निशाना एक ही हैं-युवा।
रात का दून और बढ़ती पार्टी संस्कृति भी सवालों में
दून का बदलता सामाजिक माहौल भी इस कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शहर और आसपास के इलाकों में देर रात तक चलने वाली पार्टियां, निजी समारोह और रिजार्ट-आधारित आयोजन अब सामान्य होते जा रहे हैं। राजपुर रोड, मालदेवता, सहस्रधारा, मसूरी रोड, नंदा की चौकी और रायपुर जैसे इलाकों में देर रात की पार्टियों व रेव पार्टियों को लेकर समय-समय पर चर्चाएं सामने आती रही हैं।
शहर में एमडीएमए की खेप हाईप्रोफाइल पार्टियों में खपाने की बात भी पुलिस जांच में सामने आ चुकी है। यहीं पुलिस और प्रशासन की चुनौती भी बदल जाती है। सड़क किनारे खड़े तस्कर को पकड़ना अपेक्षाकृत आसान है, लेकिन निजी पार्टी, रिजार्ट, बंद कमरे, किराये के मकान या हास्टल के भीतर चल रहे नेटवर्क की पहचान पुलिस के लिए मुश्किल बना हुआ है।
हास्टल और पीजी बने नशे के नए प्रवेश द्वार
प्रेमनगर और पटेलनगर जैसे इलाकों में बड़ी संख्या में छात्र हास्टल और पीजी में रहते हैं। अगस्त में पुलिस ने हास्टल-पीजी की जांच की तो सात संचालकों को नोटिस, एक का चालान और 17 युवकों को हिरासत में लिया गया। संचालकों को सीसीटीवी और छात्र सत्यापन के निर्देश भी दिए गए। लेकिन सवाल केवल सत्यापन का नहीं है।
हास्टल में कौन आ रहा है, यह पता चलना एक बात है; वहां कौन किससे मिल रहा है और किस माध्यम से नशा पहुंच रहा है, यह पता लगाना दूसरी। यही वजह है कि नशे के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ पुलिस की सड़क पर होने वाली कार्रवाई तक सीमित नजर आ रही है।
दून में नशे के बाजार के कई चेहरे
- प्रेमनगर-बिधौली: शिक्षण संस्थानों और छात्रावासों की मौजूदगी के कारण छात्रों तक स्मैक पहुंचने के मामले सामने आए।
- पटेलनगर-आइएसबीटी: बाहर से लाई गई स्मैक की स्थानीय स्तर पर सप्लाई के मामले सामने आए।
- रायपुर: एमडीएमए और स्मैक की बरामदगी ने पार्टी ड्रग्स की सप्लाई की चिंता बढ़ाई।
- नेहरू कालोनी-मोथरोवाला: स्मैक और चरस की बरामदगी के मामले सामने आए।
- आशारोड़ी और बाहरी मार्ग: बाहर से नशे की खेप दून तक पहुंचने के रास्ते के रूप में कार्रवाई सामने आती रही है।
- राजपुर रोड से मालदेवता और सहस्रधारा तक: देर रात पार्टियों और निजी आयोजनों के बढ़ते चलन के बीच इन क्षेत्रों में ड्रग्स की निगरानी भी चुनौती बनती जा रही है।
संकल्प कैंपस में, सप्लाई चेन शहर में
सरकार व जिला प्रशासन इन दिनों हर कैंपस में पहुंचकर छात्रों को नशे से दूर रहने का संकल्प दिला रहे हैं। जिलाधिकारी डा. आशीष चौहान ने भी युवाओं को नशा कारोबारियों के निशाने पर बताते हुए प्रशासन, पुलिस, शिक्षण संस्थानों और अभिभावकों के संयुक्त प्रयास पर जोर दिया।
वहीं जिला स्तरीय नारकोटिक्स समिति की बैठकों में शिक्षण संस्थानों में ड्रग जांच, संवेदनशील क्षेत्रों की जीआइएस मैपिंग, संस्थानों के आसपास सीसीटीवी और एंटी-ड्रग कमेटियों को सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं। लेकिन उसी समय छह छात्रों का सप्लाई नेटवर्क में पकड़ा जाना इस मुहिम की सबसे बड़ी चुनौती सामने रखता है।
क्योंकि अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि नशा कहां बिक रहा है। सवाल यह है कि कैंपस तक कौन पहुंचा रहा, हास्टल में किसके जरिए पहुंच रहा है, पार्टियों तक एमडीएमए कौन पहुंचा रहा है और कितने युवा ग्राहक बनने के बाद खुद सप्लाई चेन की कड़ी बन चुके हैं।
स्मैक से एमडीएमए तक बदल गया बाजार
दून में नशे का खतरा अब दो स्तरों पर दिखाई दे रहा है। एक ओर स्मैक, चरस और गांजा जैसे नशे का स्थानीय बाजार है, जिसकी सप्लाई शिक्षण क्षेत्रों और युवा आबादी तक पहुंचने के मामले सामने आते रहे हैं। दूसरी ओर एमडीएमए जैसी महंगी पार्टी ड्रग्स हैं, जिनका इस्तेमाल निजी व हाईप्रोफाइल आयोजनों में होने की बात पुलिस जांच में सामने आई है।
इन दोनों बाजारों के बीच साझा कड़ी है युवा और बढ़ती पार्टी संस्कृति। यही दून के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है। नशे का कारोबार अब केवल सड़क पर नहीं दिखता, बल्कि वह कैंपस, हास्टल, पीजी, पार्टी और निजी आयोजनों के भीतर अपना रास्ता बना रहा है।
