देहरादून, [जेएनएन]: एशिया पैसिफिक रीजनल नॉलेज एक्सचेंज इवेंट-2018 के तहत कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए भारत समेत श्रीलंका, इंडोनेशिया, नेपाल, संयुक्त राष्ट्र, कोलंबिया आदि देश एक मंच पर आ गए हैं। ताकि ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव कम करने के लिए वन संसाधनों का उचित आकलन कर आपसी साझेदारी से काम किया जा सके। इसी मकसद से बुधवार को भारतीय वन सर्वेक्षण के तत्वावधान में राजपुर रोड स्थित एक होटल में फॉरेस्ट रिफ्रेंस (इमिशन) लेवल्स पर दो दिवसीय कार्यशाला शुरू की गई। 

इस अवसर पर भारतीय वन सर्वेक्षण के महानिदेशक सुभाष आशुतोष ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन को कम करने के दो तरीके हैं। पहला यह कि कार्बन का उत्सर्जन ही कम किया जाए और दूसरा वातावरण में जमा ज्यादा से ज्यादा कार्बन का शोषण किया जा सके। इसके लिए जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाए जाएं, जिससे कार्बन को वातावरण से सोखा जा सके।

उन्होंने कहा कि इस दिशा में सभी देश अपने-अपने स्तर पर काम कर रहे हैं। इस कार्यशाला में भी यही प्रयास किया जा रहा है। रही बात भारत की तो अभी प्रतिवर्ष औसतन 49.7 मिलियन टन कार्बन डाईऑक्साइड कम किया जा रहा है। कार्यशाला में एफएसआई के डिप्टी डायरेक्टर प्रकाश लकचौरा सहित 13 देशों के विशेषज्ञ शामिल रहे। भारत ने तैयार की रिपोर्ट डा. आशुतोष ने बताया कि भारत ने जनवरी 2018 में एक रिपोर्ट यूएन को भेजी है, जिसमें प्रस्तावित फारेस्ट रिफरेंस एमिशन लेवल को स्पष्ट किया गया है। इसमें कार्बन डाईऑक्साइड के अलावा ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन भी शामिल है। इसकेसाथ ही इसमें जमीन के नीचे और ऊपर के बायोमास, मृत पेड़ सहित अन्य चीजें शामिल हैं।

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