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हरिद्वार में अमित शाह ने छोड़े सियासी तीर, 2027 चुनाव की बिसात बिछाई; इन मुदृों पर गरजे

Published: Sun, 08 Mar 2026 09:06 AM (IST)

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हरिद्वार में कांग्रेस पर तीखा हमला बोला और आगामी विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा ...और पढ़ें

अमित शाह ने मतदाताओं को साधने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं को दिया संकेत।

अमित शाह ने मतदाताओं को साधने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं को दिया संकेत।

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अश्वनी त्रिपाठी, देहरादून। हरिद्वार में मां गंगा के पावन तट से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक साथ कई सियासी संदेश दिए। उन्होंने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला, वहीं आगामी विधानसभा चुनाव के लिए उन्होंने भाजपा की राजनीतिक जमीन तैयार की। तीसरी बार भाजपा सरकार बनाने का आह्वान करते हुए शाह ने मतदाताओं को साधने के साथ-साथ कार्यकर्ताओं को संकेत दिया कि पार्टी अब आगामी चुनावी मोड में है और संगठन को अभी से तैयारियों में जुटना होगा।

राज्य आंदोलन के जख्म, धामी सरकार की उपलब्धियों व सांस्कृतिक उत्थान की कोशिशों का जिक्र कर उन्होंने वर्ष 2027 की चुनावी बिसात बिछाई। यह कार्यक्रम शाह की जनसभा से इतर संगठन में नई ऊर्जा भरने और चुनावी माहौल को धार देने की कोशिशों के तौर पर देखा जा रहा है।

अमित शाह ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन और रामपुर तिराहा कांड का उल्लेख कर कांग्रेस पर सीधा हमला बोला। उनका यह बयान केवल अतीत की घटना का स्मरण नहीं, बल्कि उत्तराखंड के पुराने जख्मों के लिए कांग्रेस और सपा को घेरने की कोशिश थी। राज्य आंदोलन के दौरान हुए दमन और बलिदानों का जिक्र करते हुए उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि उत्तराखंड गठन का मार्ग प्रशस्त करने में भाजपा ने ही निर्णायक भूमिका निभाई।

इसी संदर्भ में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का उल्लेख कर छोटे राज्यों के निर्माण का श्रेय भाजपा के पाले में डालने का प्रयास किया। उत्तराखंड की राजनीति में राज्य आंदोलन अभी तक बड़ा भावनात्मक आधार है। भाजपा समय-समय पर यह प्रसंग सामने लाकर कांग्रेस को असहज करती रही है, अमित शाह ने भी यह दांव चलकर कांग्रेस को घेरा।

सांस्कृतिक प्रतीकों से राजनीतिक संदेश

हरिद्वार में वर्ष 2027 में प्रस्तावित कुंभ मेले का उल्लेख भी शाह के भाषण में खासकर रहा। उन्होंने इसे केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि देश की आस्था और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा महापर्व बताया। उत्तराखंड में आस्था और सांस्कृतिक पहचान राजनीति को प्रभावित करती है, इसका ध्यान रखते हुए शाह ने गंगा, कुंभ और देवभूमि जैसे प्रतीकों का बार-बार उल्लेख कर सांस्कृतिक अस्मिता और राजनीतिक संदेश को एक साथ देने का प्रयास किया।

खास मुद्दे: जिन पर गरजे शाह

  • पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने का विपक्ष कितना ही विरोध करे हिंदू शरणार्थियों को नागरिकता देने का संकल्प पूरा किया जाएगा। धामी सरकार ने हजारों अतिक्रमण हटाने का काम किया है।
  • अंग्रेजों के बनाए पुराने कानूनों की जगह आधुनिक कानून लागू किए जा रहे हैं, जिनके पूर्ण क्रियान्वयन के बाद तीन वर्ष के भीतर सुप्रीम कोर्ट तक न्याय मिलने की व्यवस्था होगी।
  • मतदाता सूची को शुद्ध रखने की आवश्यकता, जो भारत का नागरिक नहीं है, उसका नाम मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए।

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