जागरण संवाददाता, देहरादून। सरकारी और निजी अस्पतालों में आइसीयू बेड पर कई ऐसे लोग भी भर्ती किए जा रहे हैं, जिन्हें भर्ती करने की जरूरत नहीं है। इस कारण जरूरतमंद व्यक्तियों को समय पर आइसीयू नहीं मिल पा रहा और बेड के लिए मारमारी मची है। वहीं ऑक्सीजन का भी जायज इस्तेमाल नहीं किया जा रहा। स्वास्थ्य विभाग ने भी यह बात मानी है कि जरूरत नहीं होने के बावजूद मरीजों को ऑक्सीजन या आइसीयू में रखा जा रहा है। इसे रोकने के लिए अब स्वास्थ्य महानिदेशालय ने निगरानी समिति का गठन किया है। यह समिति अस्पताल में जाकर आइसीयू और ऑक्सीजन का ऑडिट करेगी।

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. तृप्ति भट्ट ने कहा कि गंभीर संकट के दौर में आइसीयू और ऑक्सीजन के बेजा इस्तेमाल से बचना होगा। लगातार इस तरह की बातें उठ रही थीं कि कुछ अस्तपालों में न सिर्फ ऑक्सीजन, बल्कि आइसीयू का इस्तेमाल ऐसे मरीजों के लिए किया जा रहा है, जिन्हें जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि इसे रोकने के लिए निगरानी समिति बनाई गई है। जो सप्ताह में एक दिन संबंधित जिला प्रशासन से समन्वय बनाकर सरकारी और निजी अस्पतालों का औचक निरीक्षण करेगी। इस दौरान टीम देखेगी कि जो मरीज ऑक्सीजन या आइसीयू में हैं, वह उस स्थिति में हैं भी या नहीं। इसके बाद टीम अस्पताल में ऑक्सीजन और आइसीयू बेड के इस्तेमाल की ऑडिट रिपोर्ट बनाकर मुख्यालय को भेजेगी।

ऑक्सीजन की खपत व आवश्यकता पर भी टीम अपनी रिपोर्ट देगी। इस टीम में गढ़वाल मंडल से स्वास्थ्य निदेशक डॉ. भारती राणा, अपर निदेशक डॉ. मीतू शाह और कुमाऊं मंडल से निदेशक डॉ. शैलजा भट्ट व नैनीताल की उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. रश्मि पंत को शामिल किया गया है।

जान पर बन रही, तब मांग रहे ऑक्सीजन

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच चौतरफा ऑक्सीजन की मांग भी बढ़ गई है। अस्पतालों से लेकर घर पर सिलेंडर की जरूरत के रूप में मांग में निरंतर बढ़ोत्तरी देखी जा सकती है। ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू रखने के लिए जिला प्रशासन को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस विकट हालात के बाद भी कई अस्पताल ऑक्सीजन की आपूर्ति सुचारू रखने के प्रति गंभीर नहीं दिख रहे। जिला प्रशासन से ऑक्सीजन की मांग, तब की जा रही है, जब कुछ ही घंटों की ऑक्सीजन बची हो। इस स्थिति पर जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. आशीष श्रीवास्तव ने सभी अस्पताल प्रबंधकों को 24 घंटे पहले मांग भेजने के आदेश जारी किए हैं।

मंगलवार को जारी आदेश में जिलाधिकारी ने कहा कि कई अस्पताल चार-पांच घंटे पहले ऑक्सीजन की मांग कर रहे हैं। यह स्थिति बेहद खतरनाक है और ऐसे में कभी भी बड़ी दुर्घटना घट सकती है। लिहाजा, ऑक्सीजन की मांग कम से कम 24 घंटे पहले की जाए। ताकि अस्पताल तक ऑक्सीजन पहुंचाने की सभी व्यवस्था सुचारू रूप से पूरी की जा सके। क्योंकि अचानक की गई मांग के चलते कई दफा ऑक्सीजन में विलंब होने की आशंका भी रहती है। मरीजों की जान के साथ किसी भी तरह का रिस्क नहीं लिया जा सकता।

लापरवाही की तो अस्पताल प्रबंधन पर होगी कार्रवाई

जिलाधिकारी डॉ. आशीष श्रीवास्तव के मुताबिक, ऑक्सीजन की मांग में जो अस्पताल लापरवाही बरत रहे हैं और इसके चलते किसी तरह की दुर्घटना होती है तो संबंधित अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

ऑक्‍सीजन लाइन फटने की अफवाह से हड़कंप

दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की ऑक्सीजन पाइप लाइन फटने की अफवाह से हड़कंप मच गया। अस्पताल के स्टाफ और तीमारदारों को इस कारण परेशानी झेलनी पड़ी। बाद में पूरी ऑक्सीजन लाइन की जांच की गई, जिसमें किसी तरह का लीकेज नहीं मिली। दरअसल, अस्पताल में बड़ी संख्या में मरीज 24 घंटे के ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। मंगलवार को यह अफवाह फैल गई कि अस्पताल की ऑक्सीजन पाइप लाइन फट गई है। इससे वहां अफरा-तफरी मच गई। किसी ने पुलिस को भी इसकी सूचना दे दी। इस पर तुरंत पुलिसकर्मी भी पहुंच गए। वहीं कई तीमारदार भी परेशान होकर अस्पताल कर्मचारियों से पूछताछ करने लगे। बताया गया कि ऑक्सीजन आपूर्ति में किसी तरह की समस्या नहीं है। अफवाह के कारण काफी देर तक स्टाफ और तीमारदारों को परेशान रहना पड़ा।

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