ऋषिकेश, जेएनएन। Sonu Sood रील लाइफ में अक्सर खलनायक की भूमिका में पर्दे पर नजर आए सिने अभिनेता सोनू सूद कोरोना महामारी के दौर में रियल लाइफ के हीरो बनकर उभरे हैं। प्रदेश के 172 प्रवासियों को मुंबई से फ्लाइट से दून भेजने वाले अभिनेता सोनू सूद उत्तराखंडियों के दिल में बस गए हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फोन कर सूद का आभार जताया तो अभिनेता ने ट्वीट किया कि वह जल्द ही देवभूमि आकर बदरी-केदार के दर्शन करेंगे। इसके अलावा अपने एक प्रशंसक के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने इच्छा जताई कि उत्तराखंड आने पर वह यहां के पारंपरिक व्यंजन गहथ की दाल के परांठे और कंडाली (बिच्छू घास) के साग का स्वाद भी लेंगे। 

सिने अभिनेता सोनू सूद इन दिनों विभिन्न शहरों में फंसे प्रवासियों को अपने निजी खर्चे पर उनके घरों तक पहुंचाने के लिए सुर्खियों में हैं। शुक्रवार को उन्होंने मुंबई से उत्तराखंड के 172 प्रवासियों को फ्लाइट से देहरादून (जॉलीग्रांट) भेजा था। सूद स्वयं मुंबई एयरपोर्ट पर इन्हें विदा करने आए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कई महिलाएं उन्हें रक्षा बंधन पर राखी बांधने का वायदा कर रही हैं ,तो कई लोग उनका आभार जता रहे हैं।

सोनू सूद जल्द आएंगे बदरी-केदार 

इस पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने फोन पर सूद से बात की और उनका आभार जताया। शनिवार को मुख्यमंत्री ने इस पर ट्वीट भी किया। सीएम के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेता सोनू सूद ने लिखा कि,'टीएस रावत जी, आपसे फोन पर बात कर बहुत अच्छा लगा। आपने जिस सादगी और गर्मजोशी से मेरे प्रयासों की सराहना की, उससे मेरे को और बल मिला है। मैं जल्द ही बदरी-केदार के दर्शनार्थ उत्तराखंड आऊंगा और आपसे मिलूंगा।'

कंडाली का साग और गहथ क दाल के परांठे पक्के 

अपने एक फोलोअर के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिनेता ने लिखा कि 'चलो अब उत्तराखंड में कंडाली का साग और गहथ की दाल के परांठे पक्के हो गए हैं। जल्दी ही मिलते हैं, मेरे उत्तराखंड के नए परिवार से।' सोशल मीडिया पर शनिवार को भी चर्चा रही कि सोनू सूद कुछ और प्रवासियों को हवाई जहाज से उत्तराखंड भेज रहे हैं, हालांकि मुंबई से कोई फ्लाइट देहरादून नहीं आई।

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पटवारी ने की जरूरतमंद परिवार की मदद 

सिने अभिनेता सोनू सूद ने उत्तराखंड के जिन प्रवासियों को शुक्रवार को हवाई जहाज से देहरादून भेजा, उनमें एक परिवार ऐसा भी था, जिसके पास न तो पेड क्वारंटाइन के लिए पैसे थे और न ही घर जाने का खर्च। बिधौली, घनसाली, टिहरी गढ़वाल निवासी इस परिवार के 15 सदस्यों में दो गर्भवती महिलाएं और चार बच्चे शामिल थे। इस पर प्रशासन ने इन्हें संस्थागत क्वारंटाइन न भेजकर गांव जाने की इजाजत दे दी। मगर, जब उन्होंने यहां से तीन वाहन बुक करने की कोशिश की तो पता चला किराया 15 हजार रुपये होगा। ये सुनकर उनके होश उड़ गए। जब लेखपाल जयसिंह रावत को पता चला तो उन्होंने तत्काल पांच हजार रुपये की रकम मदद के तौर पर दे दी। प्रवासियों ने शेष पैसे गांव पहुंचने पर देने की बात कही। इसके बाद वह गांव रवाना हो गए।

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