यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 04, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आम आदमी पार्टी ने की सरकार की निंदा, कहा आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की उपेक्षा कर रही सरकार
आम आदमी पार्टी (आप) की प्रदेश प्रवक्ता उमा सिसोदिया ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को महीनों से वेतन नहीं देने पर आड़े ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, देहरादून। आम आदमी पार्टी (आप) की प्रदेश प्रवक्ता उमा सिसोदिया ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को महीनों से वेतन नहीं देने पर आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार पूरी तरह से संवेदनहीन हो गई है। कार्यकत्रियों ने कोरोना काल में भी गांव-गांव जाकर मेहनत से काम किया। इन्हीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को कई महीनों से वेतन नहीं मिल पाया है। जिस कारण इन बहनों के आगे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है।
शुक्रवार को आप के प्रदेश कार्यालय पर आयोजित प्रेस वार्ता में प्रदेश प्रवक्ता उमा सिसोदिया ने कहा कि आंगबाडी कार्यकत्री व सहायिकाओं को वेतन न देने से उनके परिवार के सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है। भाजपा सरकार का दोहरा चरित्र इसी बात से सामने आता है कि अपने प्रदेश प्रभारी, सह प्रभारी और राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे के लिए पानी के भाव पैसा बहाया जा रहा है। लेकिन गरीबों का हक देने के लिए सरकार के पास बजट नहीं है।
पूरा प्रदेश जानता है कि जब कोरोना का भीषण काल चल रहा था तो इन्हीं आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं ने गांव- गांव जाकर अपनी जान की परवाह किए बगैर लोगों तक मदद पहुंचाई। लेकिन सरकार इतनी निर्लज हो गई है कि उन्हें आंगनबाडी कार्यकत्ताओं का दर्द नहीं दिखाई दे रहा है। बड़े दुर्भाग्य की बात है कि दूसरों के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाली इन कार्यकत्रियों को अपनी ही देखभाल के लिए सरकार के आगे हाथ फैलाने पड रहे हैं।
यह भी पढ़ेंः उत्तराखंड: कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत बोले, बोर्ड के ऑडिट के बाद ही मामले में टिप्पणी
उन्होंने भाजपा से सवाल करते हुए कहा कि केंद्र से बार बार पैसा लेने के बावजूद भी अगर वेतन देने के लिए सरकार के पास धन की कमी है तो आखिर इस पैसे को ठिकाने कहां लगाया जा रहा है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कहीं पांच महीने तो कहीं चार महीनों से आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को वेतन का भुगतान नहीं हुआ है। इसके बावजूद भी सैकड़ों कार्यकत्री अपने कार्य को बखूबी अंजाम दे रही है।
