देहरादून, जेएनएन। करीब तेरह साल पहले बने उत्तराखंड पॉवर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के सप्लाई कोड में बदलाव की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सेवाओं और उनसे जुड़े मानक में मौजूदा समय की स्थिति को देखते हुए कई अहम बदलाव हो सकते हैं। वहीं, शिकायतों के निस्तारण में लगने वाले समय को भी कम करने की तैयारी है।

यूपीसीएल की ओर से उपभोक्ताओं को दी जाने वाली सेवाओं के लिए समय सीमा निर्धारित है। राज्य गठन के सात साल बाद काफी विचार विमर्श के बाद उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग में स्टैंडर्ड ऑफ परफॉर्मेंस रेगुलेशन 2007 अस्तित्व में आया था। इसमें उपभोक्ता सेवा से जुड़ी हर समस्या के निदान की अवधि निर्धारित की गई थी। मगर इन तेरह वर्षों में बहुत कुछ बदला। यूपीसीएल तकनीकी रूप से सक्षम हुआ और उसके संसाधन भी बढ़े। ऐसे में आयोग अब नए सिरे से रेगुलेशन में बदलाव की तैयारी कर रहा है।

लागू सप्लाई कोड पर एक नजर

  • आवेदन पत्र स्वीकृत होने के 30 दिन के भीतर नए विद्युत कनेक्शन जारी करना होता है।
  • कनेक्शन के लिए यदि पोल लगाना है तो इसकी समय सीमा 60 दिन है।
  • यदि ट्रांसफार्मर लगाना है तो 90 दिन के भीतर इसे पूरा करना होगा। वहीं, सब स्टेशन की स्थापना 180 दिन में पूर्ण करना करना होता है।
  • उपभोक्ताओं के विद्युत भार को कम करने या अधिक करने के आवेदन का निस्तारण 30 दिन के भीतर करना होता है।
  • ट्रांसफार्मर से फ्यूज उडऩे या लाइन ट्रिप होने पर शहरी क्षेत्र में चार व ग्रामीण क्षेत्र में छह घंटे के भीतर आपूर्ति ठीक करना होता है।
  • विद्युत पोल से कनेक्शन टूटने पर शहरी क्षेत्र में छह घंटे व ग्रामीण क्षेत्र में 12 घंटे के भीतर जोड़ना होता है।
  • ट्रांसफार्मर के जलने की स्थिति में 48 घंटे के भीतर नया ट्रांसफार्मर लगाना होता है, लेकिन आठ घंटे के भीतर मोबाइल ट्रांसफार्मर लगाकर आपूॢत बहाल करना अनिवार्य है।
  • लो वोल्टेज की शिकायत आने पर चार घंटे के भीतर उसका निस्तारण करना होता है।
  • विद्युत मीटर जलने की स्थिति में छह घंटे के भीतर मीटर को बाईपास कर आपूर्ति बहाल करने के साथ तीन दिन के भीतर मीटर बदलना अनिवार्य होता है।
  • यूईआरसी के सचिव नीरज सती ने बताया कि यूपीसीएल का सप्लाई कोड नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। कुछ बिंदुओं पर अभी मंथन चल रहा है। जल्द ही इसे जारी कर दिया जाएगा।

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