उत्तराखंड में 20 हजार शिक्षकों की जनगणना ड्यूटी से शिक्षा पर संकट
उत्तराखंड में 20 हजार शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाए जाने से सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका ...और पढ़ें

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राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में एक बार फिर पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका है। करीब 20 हजार शिक्षकों के प्रशिक्षण और जनगणना कार्य में लगाए जाने से विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।
प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को स्पष्ट रूप से बताया गया है कि एक दिसंबर से चार जनवरी तक उन्हें जनगणना का कार्य करना है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इस अवधि में विद्यालयों का संचालन कैसे होगा और बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी कौन संभालेगा।
शिक्षक संगठनों के अनुसार, इस सवाल पर प्रशिक्षण में कथित तौर पर यह जवाब दिया गया कि विद्यालय चलाना उनकी प्राथमिकता नहीं, बल्कि जनगणना करना प्राथमिकता है।
संगठनों ने इस व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एक ओर शिक्षकों को शिक्षण कार्य से हटाया जा रहा है, दूसरी ओर नए नामांकन, बच्चों की उपस्थिति और शैक्षिक गुणवत्ता में कमी के लिए उन्हीं की जवाबदेही तय की जाती है।
यहां तक कि नामांकन लक्ष्य पूरा नहीं होने पर प्रधानाध्यापकों का वेतन रोकने जैसे कदम उठाए जाते हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों में कभी जनगणना, कभी चुनाव, कभी बीएलओ और कभी सर्वेक्षण जैसे गैर शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है।
इससे विशेषकर एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित होती है। ऐसे में अभिभावकों से सरकारी विद्यालयों पर भरोसा कर बच्चों का नामांकन कराने की अपेक्षा करना भी विरोधाभासी है।
निजी स्कूल शिक्षकों और एनजीओ की ड्यूटी का भी प्राविधान
शिक्षक संगठनों ने सवाल उठाया कि जनगणना जैसे कार्यों में निजी विद्यालयों के शिक्षकों और एनजीओ से जुड़े कार्मिकों की सेवाएं लेने का भी नियम और प्रविधान है। इसके बावजूद सरकारी शिक्षकों पर ही अतिरिक्त जिम्मेदारियों का बोझ क्यों डाला जा रहा है। नामांकन अभियान, रैलियों और घर-घर संपर्क की जिम्मेदारी भी शिक्षकों पर है।
एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में ज्यादा असर
एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में शिक्षक के जनगणना कार्य में जाने से शिक्षण व्यवस्था प्रभावित होगी। संगठनों का कहना है कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाने का निर्णय विभाग का है, लेकिन इसके शैक्षिक परिणामों की जवाबदेही भी विभाग को लेनी चाहिए।
प्रारंभिक शिक्षा निदेशक केएस रावत ने कहा कि शासन की ओर से सभी शिक्षकों का ब्यौरा मांगा गया था, कितने शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगी है इसका रिकार्ड तैयार किया जाएगा। एकल विद्यालय के शिक्षक को इससे बाहर रखा गया है।
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