देहरादून, जेएनएन। स्वाइन फ्लू का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। आए दिन नए मरीज इस बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। यही नहीं यह वायरस मरीजों की जान भी लील रहा है। प्रदेश में स्वाइन फ्लू पीड़ित एक और मरीज की मौत हो गई है। इस तरह मरने वालों की संख्या 19 पहुंच गई। 

जानकारी के अनुसार पटेलनगर स्थित श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में भर्ती 85 वर्षीय व्यक्ति ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इस तरह राज्य में अब तक स्वाइन फ्लू से मरने वाले मरीजों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है। इनमें अकेले महंत इंदिरेश अस्पताल में 16 मरीजों की मौत हुई है। वहीं तीन और लोगों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। 

मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिन मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है वह सिनर्जी, कैलाश व दून अस्पताल में भर्ती हैं। राज्य में अब स्वाइन फ्लू पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़कर 98 हो गई है। इनमें से 19 की मौत हो चुकी है। 

कुछ मरीज अलग-अलग अस्पतालों से उपचार कर घर पर आराम कर रहे हैं। कुल मिलाकर स्वाइन फ्लू का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के दावों के विपरीत एच1एन1 वायरस आए दिन नए मरीजों को अपनी चपेट में ले रहा है। 

यूं कहा जा सकता है कि सर्द मौसम वायरस के संक्रमण के लिए मुफीद हो रहा है। यही नहीं वायरस का स्वरूप घातक भी बनता जा रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारी दावा कर रहे हैं कि स्वाइन फ्लू की बीमारी फैलाने वाले वायरस पर नियंत्रण व रोकथाम के लिए पहले से ही प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। सभी निजी व सरकारी अस्पतालों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। 

क्या है स्वाइन फ्लू 

स्वाइन फ्लू, इनफ्लुएंजा (फ्लू वायरस) के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। इस वायरस को ही एच1 एन1 कहा जाता है। इसे स्वाइन फ्लू इसलिए कहा गया था, क्योंकि सुअर में फ्लू फैलाने वाले इनफ्लुएंजा वायरस से यह मिलता-जुलता था। 

स्वाइन फ्लू का वायरस तेजी से फैलता है। कई बार यह मरीज के आसपास रहने वाले लोगों और तीमारदारों को भी चपेट में ले लेता है। किसी में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उससे कम से कम तीन फीट की दूरी बनाए रखना चाहिए, स्वाइन फ्लू का मरीज जिस चीज का इस्तेमाल करे, उसे भी नहीं छूना चाहिए। 

स्वाइन फ्लू के लक्षण 

नाक का लगातार बहना, छींक आना कफ, कोल्ड और लगातार खासी मासपेशियों में दर्द या अकडऩ सिर में भयानक दर्द नींद न आना, ज्यादा थकान दवा खाने पर भी बुखार का लगातार बढऩा गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना।  

ऐसे करें बचाव 

स्वाइन फ्लू से बचाव इसे नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी उपाय है। इसका उपचार भी मौजूद है। लक्षणों वाले मरीज को आराम, खूब पानी पीना चाहिए। शुरुआत में पैरासिटामॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी के बढऩे पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है।

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू का कहर जारी, एक और मरीज की मौत

यह भी पढ़ें: नहीं थम रहा स्वाइन फ्लू का कहर, आठ और मरीजों में पुष्टि

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू से एक और मौत, दस मरीजों में पुष्टि

Posted By: Bhanu