देहरादून, [जेएनएन]: मौसम की मार से त्रस्त उत्तराखंड में मुसीबत का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को देहरादून जिले के विकासनगर में बारिश के दौरान एक पेड़ गिर जाने से बाइक सवार युवक की मौत हो गई। इसी के साथ मौसम के चलते बीते दो दिन में दून में मरने वालों का आंकड़ा आठ हो गया है। बुधवार को बादल फटने से जिले में सात लोगों की जान गंवाई थी।

लगातार बारिश के कारण प्रदेश में मलबा आने से 123 सड़कें बंद हैं। अलकनंदा, मंदाकिनी, नंदाकिनी, शारदा और सरयू नदियां उफान पर हैं। जलस्तर बढऩे से नदी किनारे की बस्तियों में अलर्ट जारी किया गया है। दूसरी ओर बागेश्वर में रामगंगा नदी के किनारे रहने वाले 10 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इस बीच मौसम के तेवरों से राहत की उम्मीद नहीं है। राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह ने बताया कि शुक्रवार को प्रदेश में भारी से बहुत भारी के आसार बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि विभाग ने इसके लिए चेतावनी जारी की है।

33 घंटे बाद खुला यमुनोत्री हाईवे

बुधवार को चट्टान टूटने के कारण यमुनोत्री से करीब 20 किलोमीटर दूर स्यानाचट्टी में करीब 250 यात्री फंसे हुए थे। लोक निर्माण विभाग ने मशक्कत के बाद गुरुवार को दोपहर बाद करीब 333 घंटे बाद मलबा हटाकर यातायात सुचारु कर दिया। उत्तरकाशी के जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने बताया कि सभी यात्री अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हो गए हैं। इसके अलावा सुबह मलबा आने गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी करीब डेढ़ घंटे बंद रहा।

यमुनोत्री के पास भूस्खलन, बाल-बाल बचे यात्री

गुरुवार को यमुनोत्री पैदल मार्ग पर भैरों मंदिर के पास एकाएक भूस्खलन हो गया। उस वक्त करीब 14 यात्री यमुनोत्री की ओर बढ़ रहे थे। यह स्थान यमुनोत्री से करीब डेढ़ किलोमीटर पहले है। यात्रियों ने किसी तरह भागकर जान बचाई। भूस्खलन थमने पर एसडीआरएफ के जवानों ने यात्रियों को यमुनोत्री पहुंचाया।

शारदा बैराज पर आवाजाही रोकी

कुमाऊं में भी मौसम का मिजाज पहले की तरह बना हुआ है। बारिश के कारण पिथौरागढ़ जिले के थल क्षेत्र में एक शिव मंदिर की सुरक्षा दीवार ढह गई। वहीं चम्पावत के बनबसा में शारदा नदी के उफान को देखते हुए शारदा बैराज से आवाजाही रोक दी गई है। बीती पांच जुलाई को पिथौरागढ़ की धारचूला तहसील में बहे चार लोगों में से एक का शव मिल गया है। अन्य तीन की तलाश जारी है। पिथौरागढ़ और बागेश्वर को जोडऩे वाले झूलापुल के बह जाने से सीमा पर बसे चार गांवों के लोग अलग-थलग पड़ गए हैं। 

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Posted By: Bhanu