धामी सरकार कैबिनेट बैठकः 10 बिंदुओं में जानें बैठक के महत्वपूर्ण निर्णय, कई नियमों में होंगे बदलाव
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में चंपावत में हुई कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इनमें ...और पढ़ें
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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, चंपावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज चंपावत में हुई कैबिनेट बैठक में कई बड़े और महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। इनमें से कुछ बड़े निर्णय को 10 बिंदुओं में आप जान सकते हैं।
राज्य में पूर्व में वर्ग तीन, वर्ग चार की लालकुंआ बिंदुखत्ता के लिए विनियमितिकरण भूमिधरि के अधिकार की समय सीमा नवंबर, वर्ष 2022 में जो समाप्त हो रही थी उसे मंत्रालय ने एक वर्ष के लिए वृद्धि करने का निर्णय लिया है।
एक वर्ष के अंदर वर्ग तीन व वर्ग चार इस तरह के मामले हैं, उसको 2004 के सप्लीमेंट पर विनयमित करा कसते हैँ और भूमिधरि प्राप्त कर सकते हैं।
कृषि : टीडीसी के लिए लाभकारी संस्था के रूप कार्य करने और जिससे इसका बिजनेस बढ़े उसके लिए 66 करोड़ का पैकेज दिया है। जिससे राज्य व बाहर के लिए कार्य करें।
राजस्व : भूमिधरि के अंतर्गत एक्ट 2025 में राज्य सरकार ने नियमावली बनाने के लिए मंत्रीमंडल नेअनुमोदन मिली है। जिससे एक्ट के प्रावधानों को लागू करने में सरलीकरण हो सके। भूमि क्रय विक्रय में रजिस्ट्री उसके लिए पैन की बाध्यता पर मंत्रीमंडल ने सहमति दी है।
वित्त विभाग : सीसीएफ कुमाऊं व गढ़वाल को कार्यालय आदेश पावर देने पर सहमति मिली है। छठा राज्य वित्त आयोग पंचायती राज व स्थानीय निकाय जिससे वित्तीय सुविधाएं दी जाती हैं को वित्तीय अधिकार ग्रामीण व शहरी की संस्तुति मिलने पर पूर्व में राज्य में पांचवा वित्त आयोग का राजस्व था उसमें साढ़े 11 प्रतिशत प्रति निकाय तय होता था व साढ़े 12 प्रतिशत किया गया है।
गृह विभाग : कर्मचारी आचरण नियमावली में थोड़ा संशोधन हुआ है। समूह क, ख, ग के जो कर्मचारी हैं वह प्रत्येक वर्ग व समृह घ के कर्मचारी प्रत्येक पांच वर्ष पर अपनी संपत्ति का विवरण देंगे। इसके अलावा अचल संपत्ति खरीदने की सूचना अपने विभाग को देना अनिवार्य होगा।
यदि कोई ऐसे व्यक्ति से संपत्ति लेते हैँ, जिसका सरकार से संबंध हो या लेनदेन हो तो उस स्थिति में सरकार से अनुमति लेना होगा। यदि कोई चल संपत्ति कोई खरीदता है तो उसकी सूचना भी राज्य सरकार को देनी होगी।
इसके अलावा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 में किसी विशेष केस के लिए लोक अभियोजन नहीं है तो वह राज्य सरकार को सूचना देते हुए राज्य सरकार की सहमति प्राप्त कर केस व समूह के केस के लिए अभियोजक नियुक्त कर सकते हैं।
कार्मिक विभाग : सतर्कता अधिष्ठान अधिनियम जिसमें विजिलेंस का कार्य होता है। सतर्कता अधिष्ठान है उसमें पूर्व में नियम आईपीसी की धारा लिखी थी। भारतीय न्याय संहिता में धारा परिवर्तित करने का अनुमोदन हुआ है।
सतर्कता विभाग में जो विभागीय ढांचा है उसमें उप निरीक्षक, निरीक्षक, आरक्षी की सुविधा थी, लेकिन उसमें पूर्व में एक अपर उप निरीक्षक का पद सृजित किया गया था। अपर उप निरीक्षक का पद भी इंट्रोड्यूस किया गया है।
पीआरडी अधिकारी का जो पद है वह समूह ख में आता है, राज्याधीन साक्षात्कार नियमावली में समूह ग लिख दिया गया है, उसमें संशोधन कर उसे समूह ख किया गया है। लोक सेवा आयोग में भी इसे संशोधन किया जाएगा
सिंचाई विभागः विभाग में ब्रिटिश टाइम का एक्ट जो है इसके अंतर्गत उत्तरी भारत एवं जल निकास अधिनियम 1873 का एक्ट है। यह अविभाजित उत्तर भारत जिसमें उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल के लिए लागू था। इसके लिए नया एक्ट बनाने पर सहमति मिली है। सिंचाई नहर के निर्माण जल प्रबंधन आदि पर व्यवस्था होनी है।
नहर के पानी का अनाधिकृत उपयोग करने पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा नहर आदि की संरचना को क्षति पहुंचाने पर 6 माह तक कारावास भी होगा। 200 मीटर की परिधि में प्लास्टिक और खनन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
पशुपालन विभागः कुक्कुट पालन में आहार में सब्सिडी दी जाएगी। इसमें डीबीटी के माध्यम से सब्सिडी दी जाएगी। इससे 2000 कुक्कुट पालकों को फायदा होगा और दो करोड़ रुपए सब्सिडी दी जाएगी। पशुपालन डेयरी और मत्स्य विभाग का एक डायरेक्टर जनरल का पद सृजित किया गया है।
उच्च शिक्षा विभागः विभाग में एक नई स्कीम लागू किया गया है। इस समय उच्च शिक्षा विभाग में एक लाख 20 हजार छात्र अध्ययनरत हैं। नौकरी में मिल रही दिक्कतों को देखते हुए उन्हें हर सेमेस्टर में 6 क्रेडिट कोर्स कराया जाएगा।
स्किल उपलब्ध कराया जाएगा। एआई आदि कोर्स कराया जाएगा। इसके लिए 200 करोड़ रुपए की योजना को स्वीकृत किया गया है। यह 5 वर्ष के लिए होगा, जिससे सभी छात्र लाभान्वित होंगे।
निजी विश्वविद्यालय स्थापना को लेकर तमाम अड़चनें अब नहीं होंगी। इसमें भूमि और वित्तीय अड़चनें आ रहीं थीं, जिन्हें समाप्त कर पहले 10 एकड़ निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए भूमि चाहिए थी, अब 20000 वर्ग मीटर में भी बना सकते हैं। वहीं, वित्तीय मानक में 5 करोड़ रुपए की गारंटी देनी होती थी जो कि अब समाप्त कर दी गई।
