सदियों तक दुनिया की नजरों से दूर रहा उत्तराखंड का यह धाम... सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक
Uttarakhand Tourism: हेमकुंड साहिब की यात्रा सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक है, जिसके कपाट 10 अक्टूबर को बंद हो जाएंगे।
HighLights
हेमकुंड साहिब की यात्रा सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक
10 अक्टूबर को हेमकुंड साहिब के कपाट बंद हो जाएंगे
गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहां पिछले जन्म में तपस्या की थी
निर्मला बोहरा, उत्तराखंड। Hemkund Sahib History: हेमकुंड साहिब की तीर्थ यात्रा, सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक है। साथ ही इस स्थान का संबंध लक्ष्मण जी के साथ भी माना जाता है। 10 अक्टूबर को धाम के कपाट बंद होने वाले हैं।
सदियों तक यह धाम भक्तों की नजरों से दूर रहा। हेमकुंड साहिब की खोज 1934 में हुई थी। डिवाइन हेरिटेज ऑफ हेमकुंड साहिब एंड वर्ल्ड हेरिटेज ऑफ वैली ऑफ फ्लावर किताब में भी इसका जिक्र किया गया है।
हेमकुंड साहिब तीर्थ यात्रा भारत की सबसे कठिन यात्राओं में से एक मानी जाती है। यह गुरुद्वारा समुद्र तल से लगभग 15,000 फुट की ऊंचाई पर है। यहां केवल पैदल यात्रा से ही पहुंचा जा सकता है। कठिन रास्तों और बर्फीले पहाड़ों के बीच से होकर श्रद्धालु इस पवित्र स्थल पर पहुंचते हैं।
दसम ग्रंथ में हेमकुंड साहिब का वर्णन मिलता है। यही कारण है कि सिख धर्म में हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा का महत्व है। आइए जानते हैं इस बारे में।
हेमकुंड साहिब का इतिहास
- हेमकुंड साहिब चमोली जिले में 15225 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। दसम ग्रंथ में हेमकुंड साहिब का वर्णन मिलता है।
- जिसमें कहा गया है कि यहां सिखों के दसवें और अंतिम गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पिछले जन्म में तपस्या की थी।
- एक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में यहां लक्ष्मण जी ने ध्यान किया था। यहां लक्ष्मण जी का मंदिर भी है। कहा जाता है कि उक्त मंदिर उनके द्वारा स्थापित किया गया था।
कब हुई थी हेमकुंड साहिब की खोज?
हेमकुंड साहिब की खोज 1934 में हुई थी। इतिहासकार और पूर्व मंत्री केदार सिंह फोनिया की डिवाइन हेरिटेज ऑफ हेमकुंड साहिब एंड वर्ल्ड हेरिटेज ऑफ वैली ऑफ फ्लावर किताब में इसका जिक्र किया गया है।
किताब में बताया गया है कि 1930 के दशक में पत्रकार तारा सिंह नरोत्तम बदरीनाथ यात्रा पर आए थे। उन्होंने इसकी खोज की और अपने लेखों से हेमकुंड साहिब को लेकर जानकारी दी।
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कब शुरू हुई हेमकुंड साहिब यात्रा?
- साल 1934 में सेना के हवलदार मोदन सिंह ने हेमकुंड आकर गुरुवाणी में लिखी पंक्तियों से इस तीर्थ का मिलान किया।
- साल 1937 में हेमकुंड यात्रा शुरू हुई।
- हेमकुंड साहिब में पहला गुरुद्वारा 1936 में बनाया गया था।
- साल 1937 में गुरु ग्रंथ साहब की पहली अरदास हुई थी।
- चारों ओर से पहाड़ों से घिरी इस जगह पर एक बड़ा तालाब भी है, जिसे लोकपाल कहते हैं।
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