गोपेश्‍वर, चमोली [देवेंद्र रावत]: हिमालय के पांचवें धाम हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर में रेस्क्यू हेलीपैड निर्माण के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया दो साल बाद भी अधर में लटकी हुई है। जबकि, सरकार हेलीपैड के लिए लोनिवि को धनराशि तक आवंटित कर चुकी है। बताया जा रहा कि भूमि हस्तांतरण के लिए एफआरआइ (वन अनुसंधान संस्थान) देहरादून के वरिष्ठ वैज्ञानिकों को प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण करना है। इसी के बाद हेलीपैड पर कार्य शुरू हो पाएगा।

जून 2013 की आपदा ने हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग में भी भारी तबाही मचाई थी और यहां हजारों सिख यात्री कई दिनों तक फंसे रहे। इसे देखते हुए सरकार को यहां रेस्क्यू हेलीपैड निर्माण की जरूरत महसूस हुई और वर्ष 2016 में इसके लिए 47 लाख की धनराशि भी आवंटित कर दी गई। इस हेलीपैड का निर्माण निम (नेहरू पर्वतारोहण संस्थान) को करना था, लेकिन उसके हाथ खड़े कर देने पर यह जिम्मेदारी लोनिवि गोपेश्वर को सौंपी गई। 

लोनिवि ने हेमकुंड के पास हेलीपैड के लिए सुरक्षित स्थान का सर्वे कर आगणन भी तैयार कर लिया था, लेकिन भ्यूंडार-पुलना के ग्रामीण विरोध में उतर आए। हालांकि, बाद में स्थिति स्पष्ट हो जाने पर उन्होंने हेलीपैड निर्माण की सहमति दे दी। बावजूद इसके लोनिवि अब तक हेलीपैड के लिए भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं कर पाया है।

चुनौतियों भरी है हेमकुंड यात्रा

समुद्रतल से 15210 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब व लोकपाल लक्ष्मण मंदिर पहुंचने के लिए यात्रियों को 19 किमी का दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। बावजूद इसके हजारों श्रद्धालु यहां दर्शनों को पहुंचते हैं। हालांकि, इस दुर्गम यात्रा में कई यात्रियों की जान पर भी बन आती है। इसी को देखते हुए यहां रेस्क्यू हेलीपैड की जरूरत महसूस की जा रही है।

2007 में हिमस्खलन से हुई थी तबाही

वर्ष 2007 में हेमकुंड साहिब के पास अटलाकोटी हिमखंड टूटने से 22 लोगों की अकाल मौत हो गई थी। जबकि, 20 से अधिक लोग घायल हुए। जिन्हें हेमकुंड से छह किमी की दूरी पैदल तय कर घांघरिया पहुंचाना पड़ा। तब जाकर उन्हें हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर देहरादून भेजा जा सका।

हेमकुंड साहिब का माहात्म्य

गुरुवाणी में उल्लेख है कि हेमकुंड साहिब में सिखों के दसवें गुरु गोविंद सिंह महाराज ने पूर्व जन्म में तपस्या की थी। जबकि, हेमकुंड सरोवर के पास स्थित लोकपाल लक्ष्मण मंदिर लक्ष्मणजी को लोकपाल (क्षेत्र रक्षक) के रूप में पूजा जाता है। शास्त्रों के अनुसार लक्ष्मणजी ने पूर्व जन्म में शेषनाग के रूप में यहां पर तपस्या की थी।

आशीष जोशी (जिलाधिकारी, चमोली) का कहना है कि हेमकुंड साहिब में रेस्क्यू हेलीपैड की सख्त जरूरत है। निर्माण कार्य तत्काल शुरू करने के लिए मेरे स्तर से स्थलीय निरीक्षण किया जा चुका है। जल्द ही कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

डीएस रावत, (अधिशासी अभियंता, लोनिवि, गोपेश्वर) का कहना है कि हेलीपैड निर्माण के लिए लोनिवि की ओर से भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया गतिमान है। भूमि हस्तांतरण के बाद ही निर्माण शुरू किया जाएगा।

सरदार सेवा (सिंह, गुरुद्वारा प्रबंधक) का कहना है कि इस दुर्गम क्षेत्र में आए दिन रेस्क्यू के लिए हेलीपैड की जरूरत महसूस होती है। यहां ऐसा कोई स्थान नहीं, जहां इमरजेंसी लैंडिंग की जा सके। सरकार ने रेस्क्यू हेलीपैड की स्वीकृति के साथ पर्याप्त धनराशि भी आवंटित की है, लेकिन लोनिवि ने कार्य शुरू नहीं किया है।

यह भी पढ़ें: चीन सीमा पर स्थित इस ट्रैक ऑफ द इयर को सुविधाओं की दरकार

यह भी पढ़ें: नए बर्ड वाचिंग डेस्टिनेशन और ट्रैकिंग जोन की है तलाश तो चले आइए यहां

यह भी पढ़ें: उत्तराखंड के स्विट्जरलैंड हर्षिल की हसीं वादियों में 56 साल बाद लौटी बहार

Posted By: Sunil Negi