यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 13, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
उत्तराखंड के स्विट्जरलैंड हर्षिल की हसीं वादियों में 56 साल बाद लौटी बहार
उत्तराखंड का स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले हर्षिल की हसीं वादियों में विदेशी पर्यटकों की बहार लौट आई है। 56 साल ...और पढ़ें

उत्तरकाशी, [शैलेंद्र गोदियाल]: उत्तराखंड का स्विट्जरलैंड कहे जाने वाले हर्षिल का सूनापन खत्म हो चला है। इसकी हसीं वादियों में विदेशी पर्यटकों की बहार लौट आई है। चीन से 1962 के युद्ध के बाद यह इलाका 'इनर लाइन' में चला गया था। पिछले साल जून में प्रतिबंधित क्षेत्र का ठप्पा हटने के बाद अब बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटकों का आना शुरू हो गया है।
भारत-चीन सीमा के निकट भागीरथी (गंगा) के तट पर बसे हर्षिल में प्रकृति की सुरम्य वादियां न सिर्फ पर्यटकों का मन मोह रही हैं, बल्कि उन्हें आध्यात्मिक शांति का अहसास भी करा रही हैं। उत्तरकाशी जिले में समुद्रतल से 7680 फीट की ऊंचाई पर हिमालय की गगनचुंबी सुदर्शन, बंदरपूंछ, सुमेरू और श्रीकंठ चोटियों की गोद में बसा हुआ है हर्षिल गांव।
यहां जलंध्री और भागीरथी नदी के संगम पर एक शिला पर प्राचीन हरि मंदिर विराजमान है। इसीलिए हर्षिल नाम पड़ा। हालांकि, हर्षिल को असली पहचान 18वीं सदी में ईस्ट इंडिया कंपनी के कर्मचारी फ्रेडरिक विल्सन ने दिलाई। उन्हें आज भी 'द किंग ऑफ हर्षिल' कहा जाता है।
भारत-चीन सीमा के निकट होने के कारण 1962 के युद्ध के बाद हर्षिल को इनर लाइन क्षेत्र में शामिल कर लिया गया था। एक तरह का प्रतिबंधित क्षेत्र होने के कारण प्रशासन की अनुमति लेकर ही विदेशी सैलानी पहुंच सकते थे। वे यहां दिनभर तो टहल सकते थे, लेकिन रात को उन्हें वापस लौटना पड़ता था। जून 2017 में गृह मंत्रालय ने हर्षिल कस्बे को इनर लाइन से मुक्त कर दिया।
होटल व्यवसायी माधवेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि हर्षिल के लिए इस बार का सीजन बेहद सुखदायी रहा। पहली बार हर्षिल में बड़ी संख्या में पर्यटक आए और ठहरे भी। गंगा विचार मंच के प्रदेश संयोजक लोकेंद्र बिष्ट कहते हैं कि हर्षिल कस्बे के इनर लाइन से हटने के बाद यहां पर्यटन के नए द्वार खुले हैं, लेकिन इतना ध्यान रखना होगा कि हर्षिल के नैसर्गिक स्वरूप से छेड़छाड़ न हो।
हर्षिल के होटल व्यवसायियों के अनुसार जनवरी 2018 से लेकर अब तक दो लाख से अधिक पर्यटक हर्षिल की सैर कर चुके हैं। 20 हजार भारतीय और 2500 विदेशी पर्यटक हर्षिल के गेस्ट हाउस, होम स्टे व होटलों में ठहरे।
यहां हुई थी 'राम तेरी गंगा मैली' की शूटिंग
हर्षिल में कदम-कदम पर प्राकृतिक रॉक गार्डन (पत्थरों के बागीचे) फैले हुए हैं, जिन्हें संवारे जाने की जरूरत है। हर्षिल की खूबसूरती पर रीझकर ही हिंदी फिल्मों के शो-मैन राजकपूर ने 1984 में अपनी सुपरहिट फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' के अधिकांश दृश्य यहां फिल्माए थे।
भविष्य के लिए सुखद संकेत
एसडीएम भटवाड़ी देवेंद्र सिंह नेगी के अनुसार इनर लाइन से हटने के बाद विदेशी पर्यटक हर्षिल में आसानी से ठहर सकते हैं। यहां सुंदरता के साथ पर्यटकों के लिए अच्छी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। यही वजह है कि हर्षिल में पर्यटन बढ़ रहा है, जो भविष्य के लिए सुखद संकेत है।
