जोशीमठ, रणजीत सिंह रावत। देश की नवरत्न कंपनियों में शुमार एनटीपीसी (नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन) की धौली गंगा पर बन रही 520 मेगावाट क्षमता वाली तपोवन विष्णुगाड जल-विद्युत परियोजना पर बीते छह साल से काम ठप पड़ा हुआ है। इसकी वजह बनी टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम), जो वर्ष 2012 में जोशीमठ से 5500 मीटर नीचे चट्टानी मलबा गिरने के कारण परियोजना की टनल में ही दब गई। एनटीपीसी का दावा है कि तब से इस मशीन की पुनर्स्थापना का काम चल रहा है और अब तक इसमें 90 प्रतिशत सफलता मिल चुकी है। अप्रैल से मशीन काम करना शुरू कर देगी।

चमोली जिले के सीमांत जोशीमठ विकासखंड में वर्ष 2004 में शुरू हुई इस परियोजना को वर्ष 2012 में बनकर तैयार हो जाना था। लेकिन इसी वर्ष सुरंग निर्माण के दौरान कच्चे पहाड़ का कीचड़ व मलबा मशीन पर आ गिरा और वह सुरंग में ही दब गई। इसके साथ ही परियोजना का कार्य भी ठप पड़ गया। 

बता दें कि परियोजना की 12.3 किमी लंबी सुरंग के 8.3 किमी हिस्से में कार्य टीबीएम मशीन से होना था। इसमें सेलंग के पास से 5.5 किमी हिस्सा तैयार हो चुका है। जबकि, तपोवन से सुरंग के चार किमी हिस्से का कार्य ड्रिलिंग व ब्लॉस्ट से होना था, जिसमें से 2.5 किमी सुरंग तैयार हो चुकी है। एनटीपीसी प्रबंधन की मानें तो अप्रैल में टीबीएम मशीन की पुनर्स्थापना कर ली जाएगी। इन दिनों विदेशी एक्सपर्ट इसे ठीक करने में जुटे हुए हैं।

टीबीएम मशीन पर एक नजर

175 करोड़ रुपये की लागत वाली यह दुनिया की अत्याधुनिक मशीन है। एनटीपीसी के समूह महाप्रबंधक डीके मखीजा ने बताया कि इस मशीन का टनल निर्माण में उपयोग देश में पहली बार हो रहा है। जहां कठोर चट्टानी क्षेत्र होता है, वहां ये मशीन एक माह में 800 से 900 मीटर तक पहाड़ काट देती है। लेकिन, चमोली जिले के जटिल भूगोल में यह मशीन एक महीने में 200 से 300 मीटर सुरंग ही काट पा रही है। टीबीएम की खासियत यह है कि पहाड़ी के एक छोर से सुरंग काटते आगे बढ़ती है और दूसरे छोर से ही बाहर निकलती है। इसे बीच में बैक नहीं किया जा सकता। मशीन द्वारा काटी गई सुरंग के चट्टानी क्षेत्र को साथ-साथ सिग्मेंट मोल्ड कर ठीक किया जाता है।

90 प्रतिशत पूर्ण हो चुका मशीन पुनर्स्थापना का कार्य

एनटीपीसी के समूह महाप्रबंधक डीके मखीजा ने बताया कि टीबीएम मशीन पुनस्र्थापना का 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और अप्रैल से मशीन का संचालन शुरू हो जाएगा। पावर हाउस व बैराज निर्माण सहित अन्य कार्य अंतिम चरण में हैं। दिसंबर 2020 तक प्रोजेक्ट पर कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। 

868 करोड़ रुपये बढ़ी प्रोजेक्ट की लागत

पहले तपोवन विष्णुगाड परियोजना की निर्माण लागत 2978 करोड़ रुपये थी। लेकिन, सुरंग में मशीन फंसने के कारण कार्य रुकने से यह लागत बढ़कर 3846 करोड़ रुपये हो गई। इस तरह परियोजना की लागत में 868 करोड़ रुपये का इजाफा हुआ है।

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