विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

उत्तराखंड के बागेश्वर में दिखा अनोखा उल्लू, दो रंग की आंखों ने चौंकाया

Published: Wed, 03 Jun 2026 02:42 PM (GMT+05:30)

उत्तराखंड के बागेश्वर में वन विभाग को झिरौली लीसा डिपो के पास एक दुर्लभ उल्लू मिला जिसकी दोनों आंखों का रंग अलग-अलग था।

वन विभाग उपचार के बाद प्राकृतिक आवास में छोड़ेगा। जागरण

वन विभाग उपचार के बाद प्राकृतिक आवास में छोड़ेगा। जागरण

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

जागरण संवाददाता, बागेश्वर। झिरौली लीसा डिपो के समीप वन विभाग को एक ऐसा उल्लू मिला जिसकी दोनों आंखों का रंग अलग-अलग दिखाई दे रहा था। दुर्लभ प्रतीत हो रहे इस उल्लू को वन विभाग ने तत्काल संरक्षण में लेकर पशु चिकित्सकों से उसका स्वास्थ्य परीक्षण कराया। उपचार के बाद अब उसकी हालत में सुधार बताया जा रहा है।

की जा रही नियमित देखभाल 

वन दरोगा नितिन कुमार को झिरौली लीसा डिपो के पास नागर गांव में एक उल्लू बैठा दिखाई दिया। अन्य उल्लुओं की तुलना में उसका स्वरूप अलग लगने पर उन्होंने नजदीक जाकर निरीक्षण किया। इस दौरान पता चला कि उसकी एक आंख सामान्य जबकि दूसरी आंख का रंग नीला दिखाई दे रहा था। उल्लू काफी सहमा और घबराया हुआ भी लग रहा था।

वन दरोगा उसे अपने साथ लेकर आए और पशु अस्पताल में उसका परीक्षण कराया। चिकित्सकों ने आंख की समस्या को देखते हुए आई ड्राप उपलब्ध कराई। इसके बाद उल्लू को वन विभाग कार्यालय लाया गया, जहां उसकी नियमित देखभाल की जा रही है।

विभाग की ओर से दो बार दवा देने के बाद उसके स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है। रेंजर श्याम सिंह करायत ने बताया कि उल्लू लगभग पांच वर्ष का है तथा उसका उपचार जारी है। वर्तमान में क्विक रिस्पांस टीम में तैनात वन दरोगा तारा सिंह उसकी निगरानी और देखभाल कर रहे हैं। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. केके जोशी ने कहा कि दो अलग-अलग रंगों वाली आंखों वाला यह दुर्लभ उल्लू हेटरोक्रोमिया नामक आनुवंशिक स्थिति का एक अद्भुत उदाहरण है। इस अनुवांशिक भिन्नता के कारण पक्षी की दोनों आंखों में मेलेनिन का स्तर अलग-अलग होता है, जिससे एक आंख का रंग सामान्य तथा दूसरी का नीला या अलग दिखता है।

इस दुर्लभ घटना को लेकर स्थानीय लोगों और प्रकृति प्रेमियों में भारी कौतूहल है। पक्षी विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति उल्लू की देखने की क्षमता को प्रभावित नहीं करती, लेकिन इसे वन्यजीवों में एक अत्यंत अनोखा और आकर्षक प्राकृतिक रूप माना जाता है।

यह भी पढ़ें- रातभर उल्लू की तरह जागने वाले Gen Z सावधान! कहीं माइनस में तो नहीं जा रहा आपका Aura?

यह भी पढ़ें- डरावनी चीख वाला ‘जंगल का भूत’ फिर नजर आया, कॉर्बेट नेशनल पार्क में कैमरे में कैद हुआ दुर्लभ उल्लू

यह भी पढ़ें- वाराणसी में उल्लू को बंदरों ने क‍िया गंभीर रूप से घायल, इलाज के बाद वन व‍िभाग को सौंपा