वाराणसी में उल्लू को बंदरों ने किया गंभीर रूप से घायल, इलाज के बाद वन विभाग को सौंपा
वाराणसी के चिरईगांव स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बंदरों ने एक उल्लू को गंभीर रूप से घायल कर दिया। ...और पढ़ें

वाराणसी में बंदरों ने उल्लू को किया गंभीर घायल, वन विभाग को सौंपा गया।
HighLights
बंदरों ने चिरईगांव, वाराणसी में उल्लू को घायल किया।
पशुचिकित्सा टीम ने प्राथमिक उपचार कर वनविभाग को सौंपा।
घटना से वन्यजीव सुरक्षा और बंदरों के उत्पात पर चिंता।
जागरण संवाददाता, (चिरईगांव) वाराणसी। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिरईगांव के परिसर में स्थित बरगद के पेड़ पर बैठे एक उल्लू को बंदरों ने गंभीर रूप से घायल कर दिया। यह घटना स्थानीय निवासियों के लिए चिंता का विषय बन गई। घायल उल्लू की स्थिति को देखते हुए, पशुचिकित्सक डाक्टर आरए चौधरी ने तुरंत एक सचल पशुचिकित्सा वाहन की टीम को मौके पर भेजा।
टीम ने उल्लू का प्राथमिक उपचार किया और उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे उचित चिकित्सा के लिए वनविभाग को सुपुर्द कर दिया। इस घटना ने वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता को उजागर किया है।
स्थानीय निवासियों ने बंदरों के उत्पात की वजह से हुई इस घटना पर चिंता व्यक्त की है और उन्होंने वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उल्लू, जो कि पारिस्थितिकी तंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, उसको इस तरह के हमलों से बचाने के लिए बंदरों से निपटने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।
इस घटना ने यह भी दर्शाया है कि मानव गतिविधियों का वन्यजीवों पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है। बंदरों की बढ़ती जनसंख्या और उनके द्वारा किए जाने वाले बंदरों के आक्रामक व्यवहार ने स्थानीय वन्यजीवों के लिए खतरा उत्पन्न कर दिया है।
पशुचिकित्सा टीम द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की जा रही है, लेकिन यह भी आवश्यक है कि स्थानीय प्रशासन और वनविभाग इस दिशा में ठोस कदम उठाएं। उल्लू की देखभाल और उसके पुनर्वास के लिए वनविभाग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। वहीं बंदरों की वजह से इंसानों के बाद अब बेजुबानों पर भी हमले चिंंताजनक हो चले हैं।
