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उत्तराखंड के बागेश्वर में भारी भूस्खलन, शंभू नदी में बनी झील... खतरे में कुंवारी गांव

Published: Sat, 12 Sep 2026 01:00 PM (IST)

बागेश्वर के कुंवारी गांव में भूस्खलन के कारण शंभू नदी में 800 मीटर लंबी झील बन गई है, जिससे नदी का प्रवाह बाधित हुआ है।

कुंवारी में भूस्खलन से शंभू नदी में बनी 800 मीटर लंबी झील। जागरण

कुंवारी में भूस्खलन से शंभू नदी में बनी 800 मीटर लंबी झील। जागरण

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जागरण संवाददाता, बागेश्वर। कपकोट तहसील के कुंवारी गांव में हो रहे लगातार भूस्खलन ने शंभू नदी के लिए खतरा उत्पन्न कर दिया है।

नदी के दाएं ओर से पहाड़ी दरकने के कारण मलबा, बोल्डर और पेड़ नदी में गिर रहे हैं, जिससे नदी का प्रवाह बाधित होकर लगभग 800 मीटर लंबी झील का निर्माण हो गया है। वर्तमान में झील से पानी की निकासी की जा रही है, लेकिन भूस्खलन क्षेत्र की सक्रियता के कारण खतरा अभी भी बना हुआ है।

भूस्खलन का क्षेत्र अभी भी सक्रिय

सिंचाई विभाग कपकोट के अधिशासी अभियंता जीएस बिष्ट ने बताया कि गठित टीम ने झील का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण में पाया गया कि झील के मुहाने से डाउनस्ट्रीम लगभग 250 मीटर लंबाई में मलबा जमा है। झील से पानी की निकासी जारी है, लेकिन भूस्खलन का क्षेत्र अभी भी सक्रिय है।

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ऐसे में यदि ऊपर से मलबा नदी में गिरता रहा, तो झील का आकार बढ़ने और जल निकासी में बाधा आने की आशंका बनी हुई है। पिछले वर्ष सिंचाई विभाग ने पानी की निकासी के लिए नाला बनाया था, जिसके माध्यम से झील का पानी निकाला जा रहा है।

हालांकि, सक्रिय भूस्खलन के कारण यह व्यवस्था कितने समय तक प्रभावी रहेगी, यह स्पष्ट नहीं है। निरीक्षण समिति ने मलबे का तात्कालिक निस्तारण कर जल निकासी सुनिश्चित करने का अस्थायी उपाय बताया है।

निरीक्षण रिपोर्ट में झील में जमा मलबे को मानव बल और अत्याधुनिक मशीनों से हटाने की आवश्यकता बताई गई है। समिति के अनुसार, मलबे की निकासी कर पानी के प्रवाह को सुचारु रखना आवश्यक है, ताकि झील का विस्तार न हो और नदी का प्राकृतिक प्रवाह बना रहे।

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समिति ने भूस्खलन की रोकथाम और भविष्य में झील बनने की स्थिति को रोकने के लिए विशेषज्ञ एजेंसी से विस्तृत जांच कराने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में उत्तराखंड लैंडस्लाइड मिटिगेशन एंड मैनेजमेंट सेंटर (यूएलएमएमसी), देहरादून या टीएचडीसी जैसी विशेषज्ञ एजेंसियों से विस्तृत अन्वेषण कराने की आवश्यकता बताई गई है।

जांच के बाद ही भूस्खलन के स्थायी उपचार और नदी में मलबा गिरने से रोकने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जा सकेगी। टीम में अधिशासी अभियंता सिंचाई जगत सिंह बिष्ट, अवर अभियंता सिंचाई मुस्तकीन, तहसीलदार नितिशा आर्या, भू-विज्ञानी सुनील दत्त आदि शामिल थे।