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हिडन जेम है कफनी ग्लेशियर ट्रेक: 2013 की आपदा के बाद से बदहाल, खुलेगा तो बढ़ेगा पर्यटन और रोजगार

Published: Thu, 15 Oct 2026 05:24 PM (IST)

बागेश्वर में 2013 की आपदा से बदहाल कफनी ग्लेशियर ट्रेक को दोबारा खोलने की मांग तेज हो गई है।

HighLights

  1. 2013 आपदा के बाद कफनी ट्रेक बदहाल, मांग तेज

  2. झाड़ियों से ढका रास्ता, भूस्खलन से जोखिम भरा सफर

  3. मरम्मत से पर्यटन, रोजगार और वन्यजीव अध्ययन बढ़ेगा

जागरण संवाददाता, बागेश्वर। वर्ष 2013 की आपदा के बाद से बदहाल कफनी ग्लेशियर ट्रेक को दोबारा खोलने की मांग तेज हो गई है।

क्षेत्र के युवा और ट्रेकिंग प्रेमी इसके लिए प्रयास कर रहे हैं। इसी क्रम में जीतू दानू के नेतृत्व में चार सदस्यीय टीम कफनी ग्लेशियर पहुंची। चार दिन बाद लौटी टीम ने दैनिक जागरण को रास्ते की स्थिति बताई और सरकार से ट्रेक खोलने की मांग की।

टीम के सदस्य पर्यावरण प्रेमी चंदन नयाल ने बताया कि सदस्यों ने क्षेत्र की वनस्पतियों, ग्लेशियर और वन्यजीवों का अध्ययन किया। उनके अनुसार, कफनी ग्लेशियर के आसपास ऊंची चोटियां, बर्फ से ढका क्षेत्र और प्राकृतिक सुंदरता पर्यटकों को आकर्षित कर सकती है।

ट्रेक के शुरुआती चार से पांच किमी हिस्से में सबसे अधिक दिक्कत है। कई जगह रास्ता झाड़ियों से ढक गया है। भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में कफनी नदी के किनारे से गुजरना पड़ता है, जिससे सफर जोखिम भरा हो गया है। आमतौर पर चार से पांच घंटे में तय होने वाला रास्ता अब छह से सात घंटे ले रहा है।

खटिया से आगे रास्ता काफी हद तक ठीक है, लेकिन वहां भी झाड़ियों की सफाई जरूरी है। क्षतिग्रस्त मार्ग की मरम्मत और भूस्खलन प्रभावित जगहों पर सुरक्षित रास्ता बनाने से ट्रेक दोबारा तैयार हो सकता है। टीमें राजेंद्र दानू तथा प्रवीण दानू भी शामिल थे।

हिम तेंदुए के मिले पगचिह्न

टीम ने हिम तेंदुए के पगचिह्न देखे। क्षेत्र में भालू, भरल और अन्य वन्यजीव भी हैं। कफनी क्षेत्र प्राकृतिक संपदा से समृद्ध है और यहां पर्यावरण अध्ययन तथा प्रकृति आधारित पर्यटन की संभावनाएं हैं।

चार से पांच दिन में पूरा हो सकता है ट्रेक

खाती से शुरू होकर निर्धारित पड़ावों के रास्ते कफनी ग्लेशियर पहुंचने और लौटने में चार से पांच दिन लग सकते हैं। रास्ते की मरम्मत और सफाई से अनुभवी ट्रेकरों के साथ नए ट्रेकिंग प्रेमियों के लिए भी यात्रा आसान होगी।

मार्ग सुरक्षित होने पर पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है। इससे क्षेत्र की पहचान और स्थानीय युवाओं के रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। टीम ने सरकार और संबंधित विभागों से मार्ग सुधारने तथा ट्रेक की सफाई के लिए जल्द कदम उठाने की मांग की है।

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