बागेश्वर में 52 घंटे के बर्फीले तूफान से रुका ट्रेल पास अभियान, 16 पर्वतारोही सुरक्षित लौटे
देवभूमि एडवेंचर के 16 सदस्यीय दल का ट्रेल पास अभियान, जो पिंडारी ग्लेशियर से नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप तक था, 52 घंटे के बर्फीले तूफान के कारण रोकना पड़ा।
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HighLights
16 सदस्यीय दल का ट्रेल पास अभियान बर्फीले तूफान से रुका।
52 घंटे के तूफान में 10 फीट बर्फ में दबा उपकरण।
दिनेश दानू के नेतृत्व में सभी पर्वतारोही सुरक्षित लौटे।
जागरण संवाददाता, बागेश्वर। हिमालय की ऊंची चोटियों पर साहस और अनुभव के साथ मौसम का साथ भी आवश्यक होता है। पिंडारी ग्लेशियर से नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप होते हुए पिंडर घाटी को जोहार घाटी से जोड़ने वाले ट्रेल पास को पार करने निकले देवभूमि एडवेंचर के 16 सदस्यीय दल को इस बार मौसम की ऐसी चुनौती का सामना करना पड़ा कि अभियान को बीच में ही रोकना पड़ा।
लगभग 52 घंटे तक चले बर्फीले तूफान ने रास्ते ही नहीं, अभियान का लगभग पूरा सामान भी करीब 10 फीट बर्फ के नीचे दबा दिया। हालात को देखते हुए दल ने सुरक्षित वापसी का निर्णय लिया और शुक्रवार को सभी सदस्य वाछम-दऊ-जैकुनी पहुंच गए।
अभियान का नेतृत्व जतोली निवासी पर्वतारोही दिनेश सिंह दानू कर रहे थे। यह उनका सातवां ट्रेल पास अभियान था, जो लगभग 16,500 फीट की ऊंचाई पर था। दल 21 सितंबर को खाती से रवाना हुआ और 24 सितंबर को पूरी टीम एडवांस बेस कैंप में पहुंच गई।
25 सितंबर को दिनेश दानू और इंद्र सिंह ने लगभग 200 मीटर ऊंची राक वाल पर रोप लगाकर आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया। इसके बाद टीम इंटरमीडिएट कैंप लौट आई। मौसम साथ देता तो अभियान को अगले चरण में ले जाने की तैयारी थी, लेकिन रात लगभग आठ बजे मौसम अचानक बिगड़ गया।
बर्फबारी और तेज तूफान लगातार करीब 52 घंटे तक चलता रहा। लगातार बर्फ गिरने से कैंप में रखा अभियान का लगभग पूरा उपकरण करीब 10 फीट बर्फ के नीचे दब गया। बर्फीले तूफान और कठिन परिस्थितियों में आगे बढ़ना जोखिम भरा था।
टीम ने हालात का आकलन किया और अभियान को रोककर सुरक्षित लौटने का निर्णय लिया। 16 सदस्यीय दल में बंगलुरु के अरुण जोशी, पटना के मृगंग, दिल्ली के नंद किशोर और कोलकाता के अजोय चक्रवर्ती, संदीप तथा प्रशांत सहित अन्य सदस्य शामिल थे।
सपोर्ट स्टाफ में दिनेश दानू, खिलाप दानू, इंद्र सिंह, कवींद्र सिंह, महिपाल सिंह, गजेंद्र सिंह, भवन सिंह, पंकज सिंह और प्रवीण सिंह शामिल रहे। भारी बर्फबारी, तेज तूफान और करीब 16,500 फीट की ऊंचाई पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद दल के सभी सदस्य सकुशल लौटे।
दिनेश सिंह दानू ने कहा कि ट्रेल पास की कहानी अभी अधूरी है, लेकिन प्रयास जारी रहेगा। अभियान इस बार मंजिल तक नहीं पहुंच सका, लेकिन कठिन मौसम के बीच सभी पर्वतारोहियों की सुरक्षित वापसी अभियान की महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।
