संवाद सहयोगी, द्वाराहाट : कुमाऊंनी भाषा, साहित्य व संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए इसे पाठ्यक्त्रमों में शामिल करना होगा। भाषा के प्रति अभिभावकों को भी अपना नजरिया बदलकर इसके बोलचाल के लिए बच्चों को प्रेरित करना होगा। साथ ही कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण को मिलकर प्रयास करने होंगे।

यह बात नगर पंचायत सभागार में रविवार को भाषा, साहित्य एवं संस्कृति पर हुई संगोष्ठी में विधायक महेश नेगी ने कही। उन्होंने कुमाऊंनी भाषा विलुप्तता पर चिंता जताई। कहा कि इस भाषा के प्रति अभिभावकों को अपना नजरिया बदलना होगा। साथ ही इसके संरक्षण के लिए के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया। साथ ही विद्यालयों में अभियान चलाने पर जोर दिया।

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पाठ्यक्रम में सम्मलित करने की उठी मांग

कुमाऊंनी भाषा, संस्कृति एवं प्रचार समिति के तत्वावधान में हुई संगोष्ठी के दौरान विलुप्ति के कगार पर कुमाऊंनी भाषा के संरक्षण को इसे पाठ्यक्त्रम में शामिल किए जाने की पुरजोर वकालत की गई। वक्ताओं ने कहा कि अपनी भाषा का अपना अलग महत्व है। कुमाऊंनी के साथ ही गढ़वाली भाषा को बचाने के लिए इन्हें आठवीं अनुसूची में जोड़ना होगा। तभी इसका संरक्षण किया जा सकता है।

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ये रहे मौजूद

कुबेर सिंह कडाकोटी, रमेश पंत, डॉ. अमिता प्रकाश, सीपी जोशी, मनोज पाडे, नारायण रावत, नीरज कुमार, डॉ. डीपी चौधरी, हरवंश बिष्ट, केपीएस अधिकारी डॉ. हयात सिंह रावत, नंद लाल आर्या, राजेंद्र बिष्ट, नरेंद्र सिंह नेगी, प्रताप सिंह साही, अनिल चौधरी विनोद जोशी, हंसी बिष्ट, आशा काडपाल, गणेश भट्ट, देब सिंह रौतेला, एचआर आर्या, प्रकाश जोशी, लक्ष्मी चंद्र त्रिपाठी, चंद्र लाल वर्मा, भूपेंद्र रौतेला आदि।

Posted By: Jagran