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देश सेवा कर गांव लौटा फौजी अब कर रहा धरा की सेवा, पहाड़ में नई तकनीक से खेती को बढ़ावा देने पर किसान मेले में मिला सम्मान

By Deep BohraEdited By: Rahul Chauhan
Published: Tue, 06 Oct 2026 02:10 PM (IST)

भारतीय सेना से सेवानिवृत्त मनोज चंद्र उपाध्याय ने गांव लौटकर नई तकनीक से समेकित कृषि को अपनाया। उन्होंने जल संचयन ...और पढ़ें

पंतनगर किसान मेले में प्रगतिशील किसान पूर्व सैनिक मनोज चंद्र उपाध्याय को सम्मानित करते राज्यपाल गुरमीत सिंह एवं कृषि मंत्री गणेश जोशी

पंतनगर किसान मेले में प्रगतिशील किसान पूर्व सैनिक मनोज चंद्र उपाध्याय को सम्मानित करते राज्यपाल गुरमीत सिंह एवं कृषि मंत्री गणेश जोशी

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जागरण संवाददाता, रानीखेत (अल्मोड़ा)। भारतीय सेना में रहते देशसेवा कर गांव लौटा पूर्व फौजी मिसाल बन रहा है। पहाड़ की कठिन खेती को नई तकनीक अपनाकर आसान बनाने में जुटा यह पूर्व सैनिक अब अन्य ग्रामीणों को भी समेकित कृषि की ओर प्रेरित कर रहा है।

वर्षा पर निर्भर पर्वतीय क्षेत्रों में वाटर हार्वेस्टिंग के जरिये सिंचाई का विकल्प तलाश टपक विधि से फसल व पानी बचाने को किए गए सफल प्रयोग के लिए इस मेहनतकश को अखिल भारतीय किसान मेले (पंतनगर) में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (अवकाश प्राप्त) गुरमीत सिंह व कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने प्रगतिशील कृषक सम्मान प्रदान किया।

रानीखेत के समीपवर्ती कनेली गांव (हवालबाग ब्लाक) निवासी पूर्व सैनिक मनोज चंद्र उपाध्याय वर्ष 2020 में भारतीय सेना से अवकाश प्राप्त कर गांव लौटे। शहर में बसने के बजाय इस फौजी ने गांव में ही रहकर नई तकनीक से समेकित खेती पर काम करने की ठानी।

असिंचित क्षेत्र की चुनौती से पार पान के लिए उन्होंने दो वर्षा संग्रहण टैंक बनाए। इनकी क्षमता 20 हजार लीटर पानी की रखी गई, ताकि सूखे जैसे हालात बनने पर सिंचाई में उपयोग किया जा सके।

साथ ही टपक सिंचाई की विधि अपनाई, जिससे लगाए गए पौधों या फसल में थोड़ी नमी बनी रहे और पानी भी कम बर्बाद हो। दो से तीन वर्ष तक हाड़तोड़ मेहनत कर विविध फसलें उगाने के बाद अब पूर्व सैनिक मनोज ने 25 नाली (एक एकड़ से कुछ ज्यादा) क्षेत्रफल को समेकित खेती का शानदार माडल तैयार कर लिया है।

खेती संग पर्यावरणीय व औषधीय पौधों का भी संरक्षण

समेकित खेती के माडल में पूर्व सैनिक सीजनल सब्जियों व फसलों के साथ पर्यावरणीय लिहाज से अहम बहुपयोगी बांज, बुरांश, काफल आदि चौड़ी पत्ति प्रजातियों के साथ औषधीय पौधों रोजमैरी, तुलसी, गिलोय, बिच्छूघास की भी खेती में जुटे हैं। रबी के सीजन में वह काला गेहूं भी उगा रहे हैं।

कीवी की भी तैयारी
पूर्व फौजी ने बीते वर्ष उद्यान विभाग से मिशन कीवी के तहत पांच नाली क्षेत्रफल में कीवी बागान भी विकसित किया है। अगले वर्ष तक इसमें फल आने की उम्मीद है। पहले चरण में कीवी की उन्नत प्रजाति के 32 पेड़ लगाए गए हैं।

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