वाराणसी में मंदिरों के चढ़ावे से बनेगी अगरबत्ती, 80 महिलाओं को मिला रोजगार
काशी के मंदिरों में चढ़ाए गए फूलों को अब कचरा नहीं बनने दिया जाएगा, बल्कि उनसे अगरबत्ती, धूप और हर्बल ...और पढ़ें
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यह तस्वीर एआई द्वारा बनाई गई है।
HighLights
मंदिरों के फूलों से अगरबत्ती, धूप जैसे उत्पाद।
ईजी हेल्प संस्था और नगर निगम की पहल।
70-80 महिलाओं को मिला स्थायी रोजगार।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी के मंदिरों में भगवान को अर्पित फूल अब कचरा नहीं बनेंगे, बल्कि उनसे अगरबत्ती, धूप, हवन सामग्री और हर्बल गुलाल जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। कोमल सिंह की संस्था ईजी हेल्प नगर निगम के साथ मिलकर इस पहल को आगे बढ़ा रही है। करीब 110 मंदिरों से प्रतिदिन एक हजार किलो फूल-पत्तियां तीन ई-रिक्शा यानी पुष्प-रथों से एकत्र की जा रही हैं।
कोमल सिंह के अनुसार, शुरुआत 10 मंदिरों से हुई थी। एकत्र फूलों की छंटाई कर उन्हें प्राकृतिक तरीके से सुखाया जाता है। इसके बाद पीसकर पाउडर बनाया जाता है, जिससे अगरबत्ती, ड्राई स्टिक धूप और तुलसी पाउडर सहित उत्पाद तैयार किए जाते हैं। अनुपयोगी फूलों से जैविक खाद बनाने की योजना है। इस पहल से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 70 से 80 महिलाओं को रोजगार मिला है।
उन्हें हर माह आठ से दस हजार रुपये तक आय हो रही है। इससे धार्मिक अपशिष्ट को नदियों में जाने से रोकने और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिल रही है। नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल के अनुसार, यह पहल आस्था, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तीकरण को जोड़ती है। तैयार उत्पादों को देश-विदेश तक पहुंचाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
