वाराणसी में धड़ल्ले से चल रहा अवैध धंधा, दीपावली से पहले 'मौत के पटाखे' पर पुलिस का शिकंजा
वाराणसी में पटाखा बनाने का केवल एक ही वैध लाइसेंस है, जबकि शहर में कई जगहों पर अवैध रूप से पटाखे बनाए जा रहे हैं।

एआई जनरेटेड तस्वीर। पटाखा बनाने का अवैध धंधा
HighLights
वाराणसी में पटाखा बनाने का केवल एक वैध लाइसेंस।
शहर में कई स्थानों पर अवैध पटाखा निर्माण जारी।
पुलिस अवैध पटाखा कारोबार के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर रही।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। पटाखा बनाने के लिए जिले में केवल एक ही लाइसेंस जारी है। वह भी शहर से बाहर बड़ागांव के बसनी में, लेकिन पटाखा बनाने का अवैध धंधा शहर में ही कई जगहों पर चल रहा है। चोलापुर के चमरहा बाजार और सारनाथ के पैगम्बपुर में हुई घटना इसका साक्ष्य है।
हर बार घटना होने पर या दीपावली आने पर पुलिस सक्रिय होती है और छापेमारी करती है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार बेनियाबाग, लहरतारा में एक-एक व बड़ागांव में 3 लोगों को फुटकर पटाखा बेचने के लाइसेंस दिए गए हैं। फुटकर पटाखा दुकानदार 600 किलो पटाखा अपने पास रख सकता है। वहीं गोदाम संचालक पांच हजार किलो तक पटाखा अपने पास रख सकते हैं।
पटाखा दुकानों के बीच 3 मीटर की दूरी होनी चाहिए। साथ ही पार्किंग व्यवस्था अलग होनी चाहिए। वहीं पटाखा दुकानों के लिए टिन का कवर शेड होना चाहिए। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल का कहना है कि अवैध पटाखा कारोबार के विरुद्ध अभियान चलाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। कई जगहों पर भारी मात्रा में पटाखे और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है। यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
ज्यादातर शादी में पटाखा छोड़ने वाले हैं खेल में
अवैध तरीके से पटाखे बनाने का कार्य अधिकतर शादी में पटाखा छोड़ने वाले ही करते हैं। वह छोटे पैमाने पर पटाखा बनाकर वैवाहिक सीजन में बुक कर पटाखा छोड़ते हैं। राजातालाब, रामनगर, भेलूपुर, लोहता, मंडुवाडीह, दालमंडी समेत कई इलाकों में यह खेल अधिक होता है। पुलिस पहले बरामदगी भी कर चुकी है, लेकिन निगरानी में लापरवाही की जाती है।
यहां से जारी होता है लाइसेंस
जिला मजिस्ट्रेट की ओर से सौ किलो तक पटाखा के लिए लाइसेंस दिया जाता है। वहीं पीईएसओ (पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव सेफ्टी आर्गेनाइजेशन) की ओर से इससे ऊपर की मात्रा या फैक्ट्री के लिए अंतिम अनुमति दी जाती है।
यूपी के लिए क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज में है। इसका लाइसेंस जारी करने के लिए सबसे जरूरी है कि इलाका रिहायशी नहीं हो। इसके साथ ही नगर निगम, फायर ब्रिगेड से एनओसी लेनी होती है। वहीं पुलिस और एलआइयू सत्यापन करती है।
