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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रामपाल को दी शास्त्रार्थ की चुनौती, सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणियों का खंडन

Published: Mon, 19 Oct 2026 11:33 PM (IST)

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामपाल को सनातन धर्म पर आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए शास्त्रार्थ की खुली चुनौती दी है।

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HighLights

  1. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रामपाल को शास्त्रार्थ की चुनौती दी।

  2. शिवांश नारायण द्विवेदी को शास्त्रार्थ हेतु प्रतिनिधि बनाया गया।

  3. 'रामपाल का रसातल गमन' ग्रंथ का श्रीविद्यामठ में विमोचन।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। सनातन धर्म और हिंदू देवी-देवताओं पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के विरोध में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने रामपाल को किसी तटस्थ स्थान पर आमने-सामने शास्त्रार्थ करने की खुली चुनौती दी है। इसके लिए उन्होंने शिवांश नारायण द्विवेदी को अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है।

रविवार को केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में आयोजित प्रेस वार्ता में शंकराचार्य ने रामपाल की पुस्तकों में वेद-पुराण और धर्मशास्त्रों के प्रमाणों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने के आरोपों का शास्त्रीय खंडन करने की आवश्यकता बताई।

प्रेस वार्ता में रामपाल की पुस्तकों 'ज्ञान गंगा' और 'जीने की राह' में हिंदू देवी-देवताओं, धार्मिक परंपराओं, पर्वों, प्रतीकों और वैदिक विवाह संस्कार के संबंध में व्यक्त विचारों पर सवाल उठाए गए।

साथ ही पुस्तकों के मुद्रण, प्रकाशन और वितरण व्यवस्था के अलावा लखनऊ में की गई कानूनी कार्रवाई, प्राथमिकी और न्यायालय में प्रस्तुत याचिकाओं का भी उल्लेख किया गया। इस दौरान 18 प्रमुख बिंदुओं पर आधारित विज्ञप्ति के माध्यम से आरोपों और आपत्तियों को सामने रखा गया।

इस अवसर पर शिवांश नारायण द्विवेदी द्वारा संकलित ग्रंथ 'रामपाल का रसातल गमन' का विमोचन भी किया गया। मीडिया प्रभारी संजय पांडेय के अनुसार, ग्रंथ में रामपाल की ओर से सनातन धर्म और धर्मशास्त्रों पर लगाए गए आक्षेपों का शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर निराकरण प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

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